पहले ही माह में गटक गए सवा 20 करोड़ से अधिक की शराब

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छत्तीसगढ़(रा. ब्यूरो)- सरकार द्वारा लिये निर्णय के तहत मदिरा दुकानों को 1 अप्रैल से आबकारी विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है। जिसके पहले महीने का रिपोर्ट कार्ड विभाग के लिये सुकुन भरा रहा मदिरा प्रेमियों ने सरकार को संभावित घाटे से बाहर लाते हुये। शराब की बिक्री में 0.5 फीसदी अधिक की राजस्व आय दिला दी है।

एक से 30 अप्रैल के बीच जिले में 20 करोड़ 36 लाख 41 हजार 524 रूपए की शराब डकार गये प्रदेश भर के मदिरा प्रेमी, ठेकेदारों के हाथ खड़े किये जाने से उत्पन्न स्थिति के बीच सरकार द्वारा इस नियम में संशोधित करते हुए सरकारी मदिरा दुकानों से देशी व विदेशी शराब बेचे जाने का निर्णय लिया गया था। सरकार के इस निर्णय को लेकर विपक्षी दलों व कुछ सामाजिक संगठनों ने भारी विरोध भी किया और प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी की मांग करते प्रदर्शन भी किया गया था।

इन सब के बीच 1 अप्रैल से शुरू हुए सरकारी मदिरा दुकानों को मदिरा प्रेमियों ने निराश नहीं किया है। पूरे अप्रैल माह के मिले आंकड़ों के अनुसार 1 से 30 अप्रैल तक जिले के 47 देशी व 27 विदेशी शराब दुकानों से 20 करोड़ 36 लाख 41 हजार 5 सौ 24 रूपये का राजस्व आय प्राप्त किया है। जो गत वर्ष के मुकाबले 9 लाख 78 हजार 6 सौ 66 रूपये अधिक है।

रात मदिरा दुकानों की संख्या 76 थी जिसे नई आबकारी नीति जिसके अनुसार 3 हजार से कम आबादी वाले गांव से शराब दुकान बंद किया जाना है। इसके तहत जर्वे व सपोस की दुकानें नये सत्र नहीं खोली गई है। नये वित्तीय वर्ष में देशी मदिरा दुकानों की संख्या 58 से घटाकर 47 की गई। वहीं विदेशी मदिरा की संख्या 18 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है।

प्लेन में 5 तो मसाला में 10 की वृद्धि

नये वित्तीय वर्ष से सरकारी मदिरा दुकानों का संचालन प्लेसमेंट कर्मचारियों के भरोसे किया जा रहा है। सरकार ने इस बार देशी मदिरा की कीमतों में प्लेन देशी 5 रूपये तो मसाला देशी में 10 रूपये की वृद्धि की है। बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद मदिरा प्रेमियों के उत्साह में कमी नहीं आयी है।

कोचियों को भारी नुकसान

पूर्व में शराब ठेकेदार द्वारा आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते गांव-गांव में कोचियों के माध्यम से शराब बिक्री करायी जाती थी। इस बार अवस्था बदलने के साथ ही आबकारी विभाग व पुलिस द्वारा की गई, ताबड़तोड़ कार्यवाही के बाद कोंचियों के हौसले पस्त हुये है, हालांकि अभी भी चोरी हुये गांवों में शराब की बिक्री जारी है।

मनमाफिक ब्रांड नहीं मिलने का मलाल

मदिरा प्रेमियों की माने तो पूर्व में शराब ठेकेदारों द्वारा विदेशी शराब की अलग-अलग ब्राण्ड दुकानों में उपलब्ध कराई जाती थी। जिसके चलते मदिरा प्रेमियों को मनमाफिक ब्राण्ड आसानी से उपलब्ध होता रहा।

मगर सरकारी दुकानों में वैरायटी कम होने के चलते मनपसंद ब्राण्ड की शराब नहीं मिलने से मायूसी हो रही है। वहीं दुकानों में अनावश्यक विलंब औपचारिकता के नाम पर किये जाने से भी मदिरा प्रेमी खपा है।

रिपोर्ट-हरदीप छाबड़ा

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