जम्मू – कश्मीर पर नेहरु के इस फैसले के कारण एकदिन पूरा देश चीख-चीख कर रोयेगा : सरदार पटेल

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सरदार वल्लभभाई पटेल ने एक बार देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के लिए जो बातें कही थी आज वह अक्षरसः सत्य साबित हो रही है लेकिन यहाँ पछताने और रोने के लिए जवाहरलाल नेहरु और उनके परिवार के लोग नहीं बल्कि हिन्दुस्तान की सवा सौ करोंड आबादी और कश्मीरी पंडित बचे हुए है |

दरअसल आपको बता दें कि यह मामला जम्मू-कश्मीर से सम्बंधित है | बात उस समय कि है जब देश आजाद हुआ था और भारत को दो भागों में बांटकर एक को भारत तो दूसरे को पाकिस्तान नाम दिया गया था | पाकिस्तान के बनते ही पाकिस्तान के कायदे आज़म के इशारों पर कबाइलियों ने कश्मीर पर हमला बोल दिया था जिसके बाद तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय सेना को कश्मीर में पहली जंग लड़ने की इज़ाज़त दे थी और भारतीय सेना ने एक के बाद एक कई बड़ी विजयों को हासिल करते हुए लगातार कश्मीर में पाकिस्तानी सेना और कबाइलियों की टुकड़ियों को पीछे धकेलते हुए आगे बढती जा रही थी |

लेकिन तभी जो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने किया था उसने न केवल सरदार वल्लभभाई पटेल को स्तब्ध कर दिया था बल्कि बाद में कश्मीरी पंडितों के कत्लेआम का प्रमुख कारण बना और हिन्दुस्तान के लिए पिछले 69 सालों से भारत के लिए एक सर दर्द |

पंडित जवाहर लाल नेहरु और सरदार वल्लभ भाई पटेल
पंडित जवाहर लाल नेहरु और सरदार वल्लभ भाई पटेल

दरअसल आपको बता दें कि सरदार वल्लभभाई पटेल आज़ादी के बाद असम का दौरा करना चाहते थे असम के आस-पास के कई जिलों को पूर्वी पाकिस्तान आज के बांग्लादेश में मिला दिया गया था और असम के लोग ज्यादातर ईसाई धर्म को मानते थे और वे अपने आपको भारत की मुख्य धारा से जोड़कर देख रहे थे |

ऐसे में सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने सभी कार्यक्रमों को रद्द कर सबसे पहले अपना असम का दौरा तय किया और वे वहां पहुंचे | असम में सरदार लगातार 4 दिनों तक रहे और उन्होंने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपीनाथ बारदोली और प्रदेश के राज्यपाल अकबर हैदरी को आदेश दिया कि इन चार दिनों के भीतर जब तक वे असम में निवास करेंगे वहां की जनता से मिलने के उनके ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रम रखे जाएँ | ऐसा ही हुआ सरदार ने उन चार दिनों में असम के ज्यादातर लोगों से मुलाकात की और उन्हें भारत की मुख्यधारा में जोड़ने का और उनके साथ घुलने मिलने का प्रयास भी किया |

सरदार की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर नेहरु संयुक्तराष्ट्र पहुँच गए –
सरदार 4 दिनों के लिए दिल्ली से बाहर असम गए हुए थे इस बात की जानकार केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों में सभी आवश्यक लोगों को थी खासकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु को भी | इसी समय अच्छा अवसर जानकार प्रधानमंत्री नेहरु ने जम्मू-कश्मीर की समस्या को लेकर संयुक्तराष्ट्र संघ चले गए |

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल लार्ड माउंटबेटेन के साथ
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल लार्ड माउंटबेटेन के साथ

नेहरु को यह अच्छी तरह से पता था कि यदि सरदार को इस बात की भनक भी लग गयी थी वे कभी भी इसकी न ही इज़ाज़त देंगे और न ही इसका वे समर्थन ही करेंगे और उनके (सरदार वल्लभभाई पटेल) के समर्थन के बगैर नेहरु के लिए केंद्र सरकार में पत्ता भी हिला पाना असंभव था | अतः उन्होंने ने सरदार की अनुपस्थित का फायदा उठाते हुए जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर संयुक्तराष्ट्र संघ की अदालत पहुँच गए |

जब सरदार अपने 4 दिनों के असम के प्रवास को ख़त्म कर दिल्ली वापस आये और उन्हें यह पता चला कि कि जवाहरलाल नेहरु ने उनकी अनुपस्थित का लाभ उठाते हुए ऐसा किया है तो वे एकदम स्तब्ध रह गए मानों उनके पैरों के नीचे से किसी जमीन ही खींच ली हो |

पूरी दुनिया में लौहपुरुष के नाम से प्रसिद्द ब्यक्ति जिसने दुनिया दारी के हर तूफ़ान का डट कर सामना किया था अंग्रेजों और मुस्लिम लीग के हर नापाक इरादे को नाकाम किया था आज वह सरदार एक दम हताश हो चुके थे | हताशा से भरे हुए गमगीन और दुखी मुद्रा में सरदार ने कहा कि, ‘जिले स्तर का एक सामान्य वकील भी यह जानता है कि यदि फरियादी के रूप में आप अदालत में जाकर खड़े होते है तो समग्र मुकदमा सिद्ध करने की जिम्मेदारी आपकी ही हो जाती है | आरोपी को तो बस इसे केवल नकार देना होता है |’

सरदार ने आगे कहा कि, ‘जवाहरलाल ने इतनी जबरदस्त गलती की है कि है कि एक दिन वे बहुत पछतायेंगे और चीख-चीख कर रोयेंगे |’

लेख इनपुट- महामानव सरदार (डाक्टर दिनकर जोशी)
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7 COMMENTS

  1. Kya bakwas aur be sar pair ki baat hai.. please focus on quality and authenticity of your write up. Information provided by you is totally misguiding and far away from truth.. kindly quote the reference if have to prove its authenticity…

  2. नेहरू खानदान हो या कांग्रेस पार्टी हो इसकी करतूतों का ज़िक्र तो होना ही चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान में रखा जाना जरुरी है कि आज जिन चुनौतियों का सामना देश को करना पड़ रहा है, उसमे कांग्रेस जैसी गलीज़ पार्टी के ज़िंदा रहने की खुराक भी शामिल है। मोटे तौर पर अब यह कहा जा सकता है कि देश हित की राजीनितिक और आर्थिक संस्कृति पैदा करने के बजाय कांग्रेस ने लगभग सभी क्षेत्रों में अपसंस्कृति को ही बढ़ावा दिया। नेहरू का चरित्र ऐसा ही था। पर सवाल यह है कि इस संक्रमण से हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा, हमारा दर्प, हमारा गौरव या अपना देश कैसे बचे ! राजनीतिक और आर्थिक रूप से क्षेत्रीय असंतुलन और इसके लिए जिम्मेदार क्षेत्रीय महत्वकांक्षाएं आज जिस फूहड़पन और बदमिज़ाजी का उदहारण बनी हुयी हैं उसमे बेरोज़गारी आग में घी का काम कर रही है और यह सब क्षेत्रीय महत्वकांक्षाओं के प्रतीक लालू-नीतीश, अखिलेश-मुलायम-मायावती, ममता- वामदल और खुद कांग्रेस के ज़िंदा रहने के लिए मुफीद है। चुनौती यह है। जबतक एक संगठन के रूप में कांग्रेस पार्टी नेहरू खानदान को ढोता रहेगा, कांग्रेस का विकल्प विनाश ही है और उस रस्ते पर ही कांग्रेस आगे बढ़ रही है। यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि जबतक ऐसा होगा तबतक देश को नुकसान ही उठाना पड़ेगा। यह दुविधा है और इसके लिए पूंजी की जरुरत है। उसके भी संकेत अच्छे ही हैं। लेकिन समय लगेगा। तबतक हम गरीबों का दर्द शायद सिर्फ बंया ही करें।

  3. आधी अधूरी बातें मत बताया करो । जो असली बात थी वो तो बताई ही नहीं के नेहरू जाके आखिर किया क्या जिसकी वजह से सरदार पटेल ने ये सब बोला

  4. Yes. Its true story.
    Of course happening are little different. But Nehru ji did this mistake as he was absolutely unaware how Sardar Patel managed 565 Kingdoms to come under one flagship of India. As everyone knows the fact about merger of Junaghdh and Hyderabad.
    Samething could had happened in Kashmir.
    But now as we are aware Jawahar lal Nehru was not Kashmir Brahman and what he did we are paying price for it.
    Although he did many blunders as Prime Minister but Kashmir issue was Disastrous for country.
    Over Enthusiasm and lack of knowledge leads to such disasters.

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