दयाशंकर का अनुरागी से गठजोड़ हजम नहीं हो रहा कार्यकर्ताओं को

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उरई (जालौन)- समाजवादी पार्टी से निष्कासित और जिले में पार्टी को तहस-नहस करने वाले पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के साथ समाजवादी पार्टी के उरई जालौन सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र अधिकृत प्रत्याशी दयाशंकर वर्मा का गठजोड़ कार्यकर्ताओं को हजम नही हो रहा है। वह यह जानकर आश्चर्य है कि कल तक यह दोनों नेता एक दूसरे के धुर विरोधी होने के बावजूद एक कैसे हो गए। जबकि पूर्व सांसद अनुरागी को मतदाता तो दूर की बात पार्टी के कार्यकर्ता भी पसंद नही कर रहे है। इसके बावजूद दयाशंकर के साथ पूर्व सांसद अनुरागी का गठजोड़ पार्टी हाईकमान के निर्देशों के अवहेलना भी माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी को समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव द्वारा पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। तब से वह समाजवादी पार्टी से निष्कासित चल रहे है और उनके निष्कासन का पत्र भी पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव के पास आया था। पार्टी सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी के हाल ही में कुछ दिनों के लिए प्रदेश अध्यक्ष बने शिवपाल सिंह यादव से सांठगांठ कर पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी ने पार्टी के रजत जयंती समारोह में भीड़ जुटाने के लिए जालौन एवं हमीरपुर जनपद की जिम्मेदार का पत्र हासिल कर लिया जबकि पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव का कहना है कि जब तक वह जिलाध्यक्ष रहे तब तक घनश्याम अनुरागी को समाजवादी पार्टी में बहाल करने का कोई भी पत्र पार्टी हाईकमान द्वारा उनके पास नही भेजा गया।

आज भी उनके निष्कासन का पत्र उनके पास मौजूद है। वर्तमान जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव, दादी की राय भी पूर्वसांसद घनश्याम अनुरागी के प्रति ऐसी ही है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव दादी का कहना था कि जब वह जिलाध्यक्ष बने है तब से पार्टी हाईकमान द्वारा उन्हें आज तक ऐसा कोई पत्र प्राप्त नही हुआ जिसमें पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के पार्टी में बहाली की बात कहीं गई हो।

अब पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वर्तमान जिलाध्यक्ष के द्वारा पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी की समाजवादी पार्टी में बहाली से इनकार कर देने के बाद अब सवाल उठता है कि वह समाजवादी पार्टी में नही है तो फिर वह उरई जालौन सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशी दयाशंकर वर्मा के साथ चुनाव प्रचार में क्यो दिख रहे है। सदर विधायक और सपा प्रत्याशी दयाशंकर वर्मा की ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके चलते वह पूर्व सांसद के बिना प्रचार में नही उतर पा रहे है।

क्योंकि जिस तरह का विरोध पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के बीच घनश्याम अनुरागी के प्रति देखा जा रहा है उससे चुनाव प्रचार में पूर्व सांसद की मौजूदगी पार्टीके वरिष्ठ नेताओं को असहज बना रही है और वह खुलकर चुनाव प्रचार में नही पा रहे है। यहीं नही प्रचार के दौरान मतदाताओं द्वारा यह आम शिकायत की जा रही है कि चुनाव प्रचार में पूर्व सांसद को क्यो उतारा जा रहा है जबकि वह समाजवादी पार्टी से निष्कासित है और उनके कारनामों को लेकर जनसामान्य में नाराजगी की माहौल है। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान दयाशंकर के साथ पूर्वसांसद अनुरागी का देखा जाना मतदाताओं को रास नही आ रहा है। पार्टी के कई नेता एवं कार्यकर्ता यह कहते पाये जा रहे है अगर सदर विधायक दयाशंकर वर्मा पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी को चुनाव प्रचार में साथ लेकर चलते हंै तो उससे उन्हें फायदा होने के स्थान पर नुकसान अधिक होगा।
रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव

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