भारतीय ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान को जापान के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया

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टोक्यो- भारत के एक मात्र ऑस्कर पुरस्कार विजेता मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान के संगीत और उनके काम को जापान ने भी सराहा है | जापान की तरफ से ए.आर. रहमान को जापान के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले फुकोका अवार्ड से सम्मानित किया गया है | वर्ष 2016 के लिए दिए जा रहे पुरस्कारों में ए.आर. रहमान को ग्रांड प्राइज से नवाजा गया है | ए.आर. रहमान के साथ ही साथ पाकिस्तान की यास्मीन लारी को आर्ट के क्षेत्र के लिए कल्चर पुरस्कार से तथा फिलिपीन्स के मशहूर इतिहासकार एन्बेंथ आर. ओकाम्पो को इतिहास में उनके बेहतरीन योगदान के लिए अकादमिक पुरस्कार दिया गया है |

क्या है फुकोका अवार्ड-
जापान के फुकोका शहर के नाम से दिया जाने वाला यह पुरस्कार किसी भी क्षेत्र में विशेष और बहुत विशेष योगदान देने वाले ब्यक्तियों को दिया जाता है | वैसे तो इस सम्मान की स्थापना वर्ष 1989 में ही कर दी गयी थी लेकिन इस सम्मान को पहली बार वर्ष 1990 में दिया गया था | इस सम्मान में तीन तरह के कैटेगरी में पुरस्कार वितरण किया जाता है – जिनमें ग्रांड प्राइज, अकादमी प्राइज, आर्ट्स एंड कल्चर प्राइज |

2016 का ग्रांड प्राइज भारत के मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान को दिया गया है वही आर्ट्स और कल्चर के लिए पाकिस्तान की यास्मीन लारी को चुना गया था | अकैडमिक सेक्टर के लिए फिलिपिन्स के मशहूर इतिहासकार एन्बेंथ आर. ओकाम्पो को चुना गया है |

कौन है ए.आर. रहमान –
भारत के सबसे बेहतरीन संगीतकारों में शुमार ऑस्कर पुरस्कार विजेता ए.आर. रहमान जन्म से हिन्दू थे उनका नाम ए. एस. दिलीप कुमार था जो कि बाद में बदलकर ए.आर. रहमान हो गया | ए.आर. रहमान ने 1992 में मणिरत्नम की तमिल फिल्म रोज़ा से फिल्म जगत में संगीत देने का काम शुरू किया और चांस से उनकी पहली ही फिल्म म्यूजिकल हिट रही और पहली ही फिल्म में संगीतकार ए.आर. रहमान को संगीत में उनके बेहतरीन काम के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया |

बॉलीवुड में कदम –
तमिल फिल्मों में सफलता का परचम लहराने के बाद ए.आर. रहमान ने रामगोपाल वर्मा की फिल्म रंगीला से अपना हिंदी सिनेमा का सफ़र प्रारंभ किया | एक बार रहमान का यह सफ़र प्राम्भ हुआ कि फिर आजतक कभी थमा ही नहीं | ए.आर. रहमान ने तहजीब, बॉम्बे, दिल से, रंगीला, ताल, जींस, पुकार, फिजा, लगान, मंगल पांडे, स्वदेश, रंग दे बसंती, जोधा-अकबर, जाने तू या जाने ना, युवराज, स्लम डॉग मिलेनियर, गजनी जैसी फिल्मों में संगीत दिया है | रहमान के गानों की 200 करोड़ से भी अधिक रिकॉर्डिग बिक चुकी हैं। आज वे विश्व के टॉप टेन म्यूजिक कंपोजर्स में गिने जाते हैं |

ए.आर. रहमान को मिले सम्मान और पुरस्कार –

संगीत में अभूतपूर्व योगदान के लिए 1995 में मॉरीशस नेशनल अवॉर्ड्स, मलेशियन अवॉर्ड्स |
फर्स्ट वेस्ट एंड प्रोडक्शन के लिए लारेंस ऑलीवर अवॉर्ड्स |
चार बार संगीत के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता |
वर्ष 2000 में पद्मश्री से सम्मानित |
मध्यप्रदेश सरकार का लता मंगेशकर अवॉर्ड्स |
छः बार तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड विजेता |
11 बार फिल्म फेयर और फिल्म फेयर साउथ अवॉर्ड विजेता |
विश्व संगीत में योगदान के लिए 2006 में स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से सम्मानित |
2009 में फ़िल्म स्लम डॉग मिलेनियर के लिए गोल्डेन ग्लोब पुरस्कार |
ब्रिटिश भारतीय फिल्म स्लम डॉग मिलेनियर में उनके संगीत के लिए ऑस्कर पुरस्कार |
2009 के लिये 2 ग्रैमी पुरस्कार, स्लम डॉग मिलेनियर के गीत जय हो…. के लिये: सर्वश्रेष्ठ साउंडट्रैक व सर्वश्रेष्ठ फिल्मी गीत के लिये।

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