स्वच्छता अभियान और सफाई कर्मी प्रदेश का अजब हाल

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अमेठी:-देश और प्रदेश के मुखिया भले ही स्वच्छता अभियान के तहत आई ए एस और आई पी एस अफसर को झाड़ू पकड़ा दी है लेकिन जिनके लिए यह कार्य है ‘सफाई कर्मी’ इस कार्य में कभी दिलचस्पी नहीं लेते बल्कि अपने अधिकारियो की चापलूसी के बल पर वेतन प्राप्त कर रहे है। मनुष्य जीवन में स्वच्छता को स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र माना जाता है। स्वच्छता निरोगी काया की मूल आधार होती है इसीलिए स्वच्छता को जीवन में बहुत महत्व दिया गया है। गाँवों में स्वच्छता न होने से लोग अक्सर तरह तरह की बीमारियों से परेशान रहते है तथा संक्रामक रोगों का हमेशा भय बना रहता है। महानगरों व नगर पंचायतों में तो सफाई करने वालों की तैनाती बहुत पहले से है लेकिन गाँव में अब तक यह व्यवस्था नहीं होती थी।

शहरों की तरह गाँव को स्वच्छ सुंदर बनाये रखने के लिये पिछली बसपा सरकार के जमाने गाँवों भी सफाई कर्मियों की तैनाती की गयी थी। गाँवों में तैनात अधिकांश सफाई कर्मी पढ़ें लिखे हैं जो कभी खुद सफाई नहीं करने आते हैं बल्कि कुछ लोगों ने अपनी जगह पर प्राइवेट लोगों सफाई कर्मी के रूप में लगा दिया गया है। गाँवों में तैनात अधिकांश सफाई कर्मी गाँव नहीं आते हैं और प्रधान सेकेट्री और ब्लाक तक सीमित रह जाते हैं। कुछ जगहों पर स्कूलों की सफाई मजबूरी में शिक्षकों या छात्रों को करनी पड़ रही है क्योंकि कुछ इने गिने गाँवों को छोड़कर अधिकांश गाँवों में सफाई कर्मी नहीं आते हैं जिससे गाँव में हमेशा गंदगी का प्रकोप बना रहता है। सफाई कर्मी गाँव में सफाई करने की जगह सरकारी अधिकारियों की जी हजूरी करने में लगे रहते हैं तथा उन्हीं के बल पर हर महीने का वेतन पा रहे हैं। सरकार भले ही गाँव गली मुहल्लों को स्वच्छ बनाये रखने के नाम पर करोड़ों रूपये सरकारी खजाने का खर्च कर रही हो लेकिन इसका लाभ गाँव के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। गाँव के लोग आज भी पहले की तरह गंदगी के बीच रहने के लिये मजबूर हैं और गाँवों में सफाई कर्मी होने के बावजूद लोगों को गंदगी के बीच रहना पड़ रहा है। कुछ गाँव ऐसे भी हैं जहाँ के लोगों ने आजतक सफाई कर्मी के दर्शन तक नहीं किये हैं और उन्हें यह पता ही नहीं है कि उनके यहाँ किस सफाई कर्मी की तैनाती है।

सफाई कर्मियों की मनमानी ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है तथा स्वच्छता अभियान बाधित हो रहा है। गाँव में सफाई न होने के कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और लोग असामयिक काल के गाल में चले जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी का सफाई स्वच्छता अभियान सफाई कर्मियों के गाँवों में न आने से धरातल पर मूर्तरूप नहीं ले पा रहा है। गाँवों सफाई कर्मी की तैनाती सफाई करने के लिये की गयी है अगर वह अपने गाँव को साफ सुथरा नहीं रख सकते हैं तो सफाई कर्मी के पद से उन्हें हटा देना बेहतर होगा।

रिपोर्ट- हरि प्रसाद यादव

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