अतिक्रमण हमारा अधिकार है

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प्रतीकात्मक

रायबरेली ब्यूरो : जहां एक तरफ सूबे के कई जिम्मेदार अफसर विभिन्न जिलो के अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं तो वही जनपद रायबरेली मे अभी योगी सरकार की फरमानो का ठीक से असर नही दिख रहा है ज्यादा तर जिम्मेदार अफसर AC में ही बैठ कर जिले का हालचाल लोगों से लेकर संतुष्ट हो रहे हैं | जबकि इनकी जिम्मेदारी बनती है कि शिकायतों को गंभीरता से ले, लेकिन एेसा नही है यहाँ जनहित की तमाम समस्याओं को लेकर समाज के बुद्धिजीवी व समाज सेवी समेत व्यापारी रोज शिकायती पत्र देकर समस्या से अवगत कराते हैं या भी अपना रोल देती है और समय समय पर जिला प्रशासन को जगाने का काम होता रहा है |

 

लेकिन विडम्बना है कि यह बातें  सिर्फ समाचार पत्रो की लाईने ही बन कर रह जाती है बता दें कि आज शहर से लेकर ग्रामीण अंचलो तक जाम की समस्या नसूर बन चुकी है, मतलब अवैध अतिक्रमण जो खुले आम सड़कों पर काबिज दिखता है, लेकिन जिला प्रशासन कार्यवाही करता है तो पान की दुकान सब्जी, मोची, ठेला अादि गरीब लोगो पर लेकिन सड़क के किनारे दुनिया भर ट्रांसपोर्ट की एेजेंशिया खुलती जा रही है जिनकी दर्जनो से अधिक चौपहिया वाहन फुटपाथ पर लाईन से खडी रहती है यही नही शहर के कैनाल रोड, अस्पताल रोड डिग्री कालेज चौराहा सब्जी मंडी आदि स्थानो पर तो चलना मुश्किल हो गया है और तो और शहर मे तमाम होटल बरात घर बनवा दिये गये हैं जिनके पास पार्किंग की सुविधा तक नही है | बरात या अन्य कार्यक्रमो मे जिस तरह से सड़को पर वाहन खडे़ कर दिये जाते हैं मानो सड़क भी होटल के किराये के साथ बुक कर दी गई है | सब्जी मंडी में 90 प्रतिशत दुकानदार अपनी दुकान छोड़ कर सड़को पर ही व्यापार कर रहे हैं जिसका नतीजा घंटो जाम आम जनता चिलचिलाती धूप में जाम की झाम मे फंसी रहती है लेकिन जिले का कोई बडा़ अफसर इन हलातों से निपटने के लिए मैदान मे नही उतर पा रहा है

रिपोर्ट – अनुज मौर्य  

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