वाराणसी: अतिक्रमण से जाम के झाम से जनता को बेहद परेशानी

वाराणसी (ब्यूरो)- धर्म व संस्कृति की राजधानी काशी में जाम की सबसे बड़ी समस्या है। बदहाल सड़कें, विकास के नाम पर सड़कों की खोदाई, अतिक्रमण, बेतरतीब खड़े वाहन, पार्किंग की व्यवस्था न होना आदि इस समस्या को और जटिल बना रहे हैं। सड़क के किनारे बने होटल, मैरेज लॉन, रेस्टोरेंट, दुकानदार दुकानों के सामने फुटपाथ  के साथ ही सड़कों पर कब्जा किये हैं।

आलम ये है कि कई स्थानों एक-दो फीट नहीं, बल्कि दस-दस फिट तक कब्जा कर लिए हैं। जिसके चलते सड़कें संकरी हो गई जिन मार्गों से दो बड़े वाहन आसानी से निकल सकते थे, वहां  एक का निकलना भी मुश्किल हो गया है। जिसके लिए भवन स्वामी के साथ-साथ विकास प्राधिकरण, नगर निगम व जनपद की पुलिस दोषी है। जो सब जानने के बाद भी मूकदर्शक बने रहते हैं और सुविधा शुल्क लेकर आंखें बंद कर लेते हैं। जिसका खामियाजा नगरवासियों के साथ विदेशी पर्यटकों को भी भुगतना पड़ता है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में नौकरशाही रवैये के चलते सदियों पूर्व की स्थिति से भी स्थिति बदत्तर हो चली है। शहर के पाश इलाकों में नगर-निगम द्वारा स्वयं अतिक्रमण किया जा रहा है। इसको देखते हुए दुष्यंत कुमार की वो पंक्तियाँ “कहाँ तो तय था चिरागां हर घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए” एकदम सटीक बैठती हैं। हम आपको तेलियाबाग मरी माई मंदिर के पास से होकर आईपी माल तक जाने वाले मार्ग की सच्चाई से रूबरू कराने का प्रयास कर रहे हैं जो एक छोटा नमूना मात्र है ऐसे कई इलाके हैं, जहां इस तरह जे अवैध अतिक्रमणों के चलते सड़कें गलियों के रूप में परिवर्तित हो चुकी हैं।

तेलियाबाग से सिगरा तिराहे तक जाने वाला मार्ग जिसकी चौड़ाई  14 मीटर है। सड़क के एक ओर खड़ंजा व दूसरी ओर लगभग आठ फीट चौड़ा नाला है जो एक निजी चिकित्सालय के आगे जाकर मुड़ जाता है। इस नाले को प्रशासन ने कंक्रीट के बड़े-बड़े पटिया से ढकवा दिया। जिसे आस-पास रहने वाले भवन मालिकों व दुकानदारों ने पक्का चबूतरा बनाकर कब्जा जमा लिया गया है। सड़क के दूसरी ओर दुकानदारों द्वारा पटरी पर कब्जा जमा लिए जाने से पक्की सड़क का ही हिस्सा आम जनमानस के लिए बचा है। उसमें भी कोढ़ में खाझ का काम जिला प्रशासन ने लगभग तीन फीट का डिवाइडर बनाकर कर दिया, इतने तक ही मामला सीमित रहता तो भी शायद गनीमत होती। परन्तु जिस विभाग के पास सड़को को अतिक्रमण मुक्त कराने का जिम्मा है उसने स्वच्छता के नाम पर जगह-जगह बड़े-बड़े कूड़ेदान रखवा दिए गए तथा सड़क के किनारे नाले व पटरी पर कूड़ा घर व शौचालयों का निर्माण करा दिया गया है। इन कुड़ाघरों व शौचालयों की आड़ में पटरी व्यवसाइयों द्वारा अपना रोजगार फैला लिए जाने से आये दिन जाम की समस्या बनी रहती है।

सड़क की चौड़ाई 14 मीटर-
लोक निर्माण विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न बताते हुए कहा कि विभाग में उपलब्ध रिकार्ड के अनुसार तेलियाबाग से सिगरा तिराहे तक सड़क की चौड़ाई 14 मीटर है। सड़क के किनारे पटरी की चौड़ाई नहीं दर्ज है। प्रशासन द्वारा डिवाइडर बनवाये जाने से सड़क की चौड़ाई लगभग तीन फीट कम हो गई है।

अतिक्रमण प्रशासनिक अक्षमता का द्योतक-
पिंड्रा के पूर्व विधायक अजय राय का कहना है कि शहर की कोई भी सड़क अतिक्रमण मुक्त नहीं है प्रशासन द्वारा उचित प्रबंधन न किये जाने के कारण इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न हुई है। तेलियाबाग से सिगरा तिराहे तक हुआ अतिक्रमण प्रशासनिक अक्षमता को परिलक्षित करता है। शासन-प्रशासन द्वारा ऐसे लोगों को नोटिस देनी चाहिए बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो इनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।

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