ATM बड़े रईस हैं, 2000 से कम की बात ही नहीं सुनते

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देहरादून (ब्यूरो)- नोटबंदी का असर अब तक खत्म नहीं हुआ। बेशक पीएम मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और खुद रिजर्व बैंक के गवर्नर हालात सुधरने का दावा कर रहे हों लेकिन उपभोक्ता की तकलीफ बरकरार है। हालांकि अब दिक्कत नगदी की नहीं एटीएम से निकलने वाली करेंसी की है। आलम ये है देहरादून के कई कस्बाई इलाकों में इतने दिनों बाद भी बाजार और एटीएम में मुद्रा की तरलता लय पर नहीं लौटी है।

फिर चाहे वो घंटाघर पटेल नगर क्लेमेंट टाउन सुभाष नगर रानीपोखरी हो या बालावाला, हर्रावाला जैसे देहरादून से सटे इलाके या फिर सेलाकुंई जैसा औद्योगिक इलाका। हर जगह एटीएम से दो हजार का ही नोट निकल रहा है। 500 और 100 के नोटो की दिक्कत बरकरार है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन उपभोक्ताओं को हो रही है जिनकी रोजी-रोटी छोटे और मंझले दर्जे के निजी सेक्टर से चलती है। एक तो कम पगार ऊपर से एटीएम से 2000 के नोट की मजबूरी।

ऐसे में इस तबके के उपभोक्ता को करारी मार पड़ रही है। उन्हें बड़ा नोट लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे उनकी बचत पर गहरा असर पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण और कस्बाई इलाको में उपभोक्ता की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। मतलब ये है कि 50 दिन का वादा एक लंबा आर्सा गुजर जाने के बाद भी कसौटी पर खरा नहीं उतरा है

फोटो क्रेडिट- इन्टरनेट

रिपोर्ट- मोहम्मद शादाब
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