आस्ट्रेलिया के अख़बार ने सोलर पैनल को खाते हुए भारतियों को दर्शाया, तीखी प्रतिक्रिया आई

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आस्ट्रेलिया – आस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित अखबार ने भारत का मजाक उड़ाते हुए एक अखबार में एक कार्टून छापा है जिसमें एक भारतीय परिवार को सोलर पैनल खाते हुए दिखाया गया है I आपको बता दें कि इस कार्टून के माध्यम से दर्शाया गया है कि एक भारतीय परिवार का एक सदस्य सोलर पैनल को पहले तोड़ता है और उसी परिवार का दूसरा व्यक्ति उस पैनल के टुकड़ों को आम की चटनी के साथ खाने का प्रयास करता है I

गौरतलब है कि इस कार्टून को आस्ट्रलिया के एक प्रतिष्ठित अख़बार ‘द ऑस्ट्रेलियन’ में प्रकशित किया गया है I इस कार्टून के प्रकशित होने के बाद ही पूरी दुनिया के विभिन्न राष्ट्रों से लोगों ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है I साथ सोशल मीडिया पर भी इस कार्टून को लेकर लोगों ने आलोचना की है I

आपको ज्ञात होगा की हाल ही फ़्रांस की राजधानी पेरिस में जलवायु सम्मलेन हुआ था I जहाँ पर ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से कम रखने पर बातचीत की गयी थी I इस समझौते के तहत सभी विकासशील देशों को प्रतिवर्ष साल 2020 से 100 अरब डालर की आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रतिबध्दता को भी कहा गया है I इसी सम्मलेन में भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन पहल का भी विचार दिया जिसका शुभारंभ भी इस दौरान हो गया।

सोशल मीडिया और अकादमिक जगत में इस कार्टून को नस्लवादी बताते हुए इसकी आलोचना की जा रही है। मैकरी विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की प्राध्यापिका अमंद वाइज ने गार्डियन ऑस्ट्रेलिया से कहा कि उनके विचार में कार्टून स्तब्ध करने वाला है और यह ब्रिटेन, अमेरिका या कनाडा में अस्वीकार्य होगा। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व का प्रौद्योगिकी केंद्र है और धरती पर कुछ सर्वाधिक हाईटेक उद्योग दुनिया के उस हिस्से में हैं। इसका यह संदेश है कि विकासशील देशों में लोगों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए इन प्रौद्योगीकियों की जरूरत नहीं है, उन्हें भोजन की जरूरत है।

ट्विटर पर इस कार्टून की व्यापक रूप से निंदा की गई है। कई लोगों ने भारत के तेजी से विकसित होते सतत उर्जा क्षेत्र की ओर ध्यान खींचा है। डीकीन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक यीन पारडीज का भी विचार है कि कार्टून का संदेश नस्लवादी है। उनके हवाले से बताया गया है कि संदेश यह है, भारत अक्षय उर्जा का इस्तेमाल करने में विवेकहीन है और उसे कोयले पर निर्भर रहना चाहिए।

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