साइबर अपराध के प्रति जागरूक रहने की जरुरत

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प्रतीकात्मक
कानपुर देहात : एटीएम से नकद निकालने से पहले हरी लाइट जरूर देखें। न जलने का मतलब एटीएम से छेड़छाड़ की गई है और कार्ड क्लोनग का खतरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस तथा बैंक के टोल फ्री नंबर पर सूचना दें। यह बात मंगलवार को यमुना बीहड़ पट्टी के गांवों में लोगों साइबर अपराध के बाबत जागरूक करते हुए साइबर क्राइम कंट्रोल टीम विजय श्रीवास्तव ने कही। एसपी के निर्देश पर देवरहट, मूसानगर, चांदपुर, गजनेर समेत विभिन्न चौराहों पर जागरूकता अभियान चलाया गया। लोगों को मोबाइल फोन पर इनाम का लालच देकर और एटीएम का पिन पूछकर साइबर ठगों से सावधान किया और जागरूकता से बचाव को लेकर सचेत किया।

टीम प्रभारी विजय श्रीवास्तव ने कहा कि कोई भी बैंक कभी किसी से फोन करके जानकारी नहीं मांगता। बैंक के नाम पर फोन काल करने वालों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि इनाम जीतने के लालच में पड़ कर मोबाइल पर आने वाली किसी प्रतियोगिता का हिस्सा न बनें। एटीएम में एक से अधिक लोगों के पाए जाने पर कठोर कार्यवाही का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सड़क पर गिरे रुपये, पर्स या गहने दिखाकर कोई कहे कि ये आपके हैं तो सावधान हो जाइए। सोने के बिस्कुट या गुल्ली दिखाकर ठगी करने वाले सक्रिय हैं, इनसे सावधान रहें और पुलिस को सूचना दें। ठग कपड़े पर गन्दगी लगाकर आपको अपना शिकार बना सकते हैं। टीम में आरक्षी अरविन्द कुमार तिवारी, मनोज चौधरी, राम प्रकाश ¨सह आदि मौजूद रहे।

शातिर ठग करते से एटीएम कार्ड की क्लोनग

जब भी एटीएम से रुपये निकाल रहे हैं तो जल्दबाजी बिल्कुल न करें। क्योंकि शातिर ठग फायदा उठाकर आपके एटीएम कार्ड का क्लोन बना खाते से रुपये पार कर सकते हैं। तकनीकी आधार पर ठग आपके कार्ड की जानकारी लेकर मिनटों में दूसरा कार्ड बना लेते हैं।

ऐसे होती है कार्ड क्लोनग

साइबर अपराधी बेहद खुफिया तरीके से एटीएम और डेबिट कार्ड क्लोन करते हैं। कार्ड डाटा चोरी करने के लिए स्कीमर मशीन और पासवर्ड के लिए बटन जैसा कैमरा लगाते हैं। कार्ड स्वाइप करते ही आपके कार्ड का मैग्नेटिक डाटा कापी हो जाता है। इसके बाद एमएसआर 6.5 साफ्टवेयर की सहायता से डाटा को खाली कार्ड में डालकर क्लोन तैयार किया जाता है। खाताधारक के पास कार्ड होने के बावजूद दूसरे क्लोन कार्ड से खाते से रुपये निकाले जा सकते हैं।

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