हार्ट अटैक को कैसे रखे अपने से दूर ?

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प्रतीकात्मक फोटो

हाल ही में भारत वर्ष ने अपना एक बहुमूल्य रत्न पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और वास्तविक रूपों के सच्चे अर्थों के भारत रत्न को खो दिया हैं I देश के इस सबसे चहेते राष्ट्रपति और वैज्ञानिक का निधन ह्रदयघात यानिकी हार्टअटैक के कारण से हुआ हैं I कहते हैं ब्यक्ति को हमेशा घटनाओं से सीखने की आवश्यकता होती हैं और मेरे ख्याल से इतिहास भी इन्ही कारणों से भी लिखा जाता हैं I जिस रोग के कारण आज हमनें देश के महान वैज्ञानिक को असमय ही खो दिया हैं हम नहीं चाहते कि ऐसी दुर्घटना फिर कभी किसी और के साथ हो I

 

दुनिया में हर कोई अमीर नहीं होता हर किसी के पास इतना धन नहीं होता कि वह अपना इलाज बड़े से बड़े अस्पताल में करवा सके और सबसे बड़ी बात हैं यह हैं कि अस्पताल तो अब आये हैं I क्या पहले कभी किसी को ह्रदयघात (हार्ट अटैक) नहीं होता था अगर होता था तो भारत के आयुर्वेद के इतिहास में ग्रंथों में इसका क्या इलाज हैं जब हमनें यह खोजने की कोशिस की तब हमें यह अहम् जानकारी मिली जिसे आपके साथ साझा करना हमनें उचित समझा I तो आइये जानते हैं कि कैसे आता हैं आर्टअटैक और क्यों और कैसे पा सकते हैं इससे छुटकारा –

देश और देश के बाहर भी जिस किसी ब्यक्ति को कभी हार्टअटैक आता हैं डाक्टर उसे एंजियोप्लास्टी की सलाह देते हैं क्यों ?

डाक्टर हर उस ब्यक्ति को जिसे कभी ह्रदयघात (हार्टअटैक) आ चुका हैं या फिर उस बिमारी से जूझ रहा है उसे एंजियोप्लास्टी की सलाह इसलिए देते हैं क्योंकि चिकित्सा विज्ञान (मेडिकल साइंस) के मुताबिक डाक्टरों का ऐसा कहना होता हैं कि आपके ह्रदय की जो नली हैं जिससे रक्त का संचार होता हैं वह ब्लॉक यानिकी जाम हो चुकी हैं और वह इस एंजियोप्लास्टी के जरिये एक ऑपरेशन करके उस नली में एक स्प्रिंग लगाते हैं जिससे की आपके ह्रदय का रक्त संचार सही तरीके से हो सके I

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अक्सर लोगों को कई-कई बार एंजियोप्लास्टी करवानी पड़ जाती हैं क्योंकि कुछ समय के बाद यह फिर से ब्लॉक यानिकी जाम हो जाती हैं और आपको फिर से उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता हैं और आपका इसमें समय और तमाम धन की बर्बादी भी होती हैं I

 

आखिर क्यों आता हैं ह्रदयाघात (हार्टअटैक) और कैसे ब्लॉक हो जाती हैं आपकी ह्रदय की नली –

हम आजकल की अपनी दिनचर्या में जो कुछ भी खाते हैं उनमें से ज्यादातर चीजें अम्लीय होती हैं I अम्ल को अगर हम अंग्रेजी भाषा में समझे तो इसे एसिड(ACID) कहते हैं I और इसकी अधिकता से ही हमें एसिडिटी की शिकायत होती हैं I

हमें जब एसिडिटी की शिकायात होती हैं तो हमें कच्ची डकारे आना, मुंह से पानी आना, पेट में जलन होना आदि I ह्रदयघात यानिकी हार्टअटैक की शुरुआत भी यहीं से हो जाती हैं I भारतवर्ष का इतिहास दुनिया का सबसे पुराना और सबसे अधिक समृद्ध इतिहास माना जाता हैं I ऐसा भारत के इतिहास के साथ इसलिए कहा जाता हैं क्योंकि हमारे देश के हजारों साल पुराने इतिहास में विज्ञान, चिकित्सा, समाज हर क्षेत्र में बहुत ऊँचाई तक शोध किये गये थे I उसी में चिकित्सा के क्षेत्र में भी अनेकों अनेक शोध हैं I

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भारत के इतिहास में एक महर्षि हुए थे जिनका नाम था “महर्षि वागवट” उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक अनुसंधान किये और उन्होंने अपने अनुसंधानों पर ही एक ग्रन्थ की रचना की थी जिसका नाम था “अष्टांग ह्रदयम” उसी किताब के एक सूत्र में उन्होंने ह्रदयघात (हार्ट अटैक) की बिमारी का भी पूरा वर्णन लक्षण और उपचार के साथ किया हुआ हैं I आज हम आपको उसी में से समझाने का प्रयास कर रहे हैं I

महर्षि वागवट के अनुसार अगर आपको जीवन में कभी भी अगर ह्रदयघात की शिकायत हो रही हैं तो आप तुरंत ही समझ लीजिये कि आपके ह्रदय की नलियों में ब्लॉकेज प्रारंभ हो चुकी हैं I और इसका सीधा मतलब यह हैं कि आपके रक्त में अम्लीयता (एसिडिटी) बढ़ चुकी हैं या फिर बढ़ रही हैं I

जैसा की हम ऊपर बता रहे थे कि ह्रदय की नलियाँ कैसे जाम होती हैं तो हम जो कुछ भी खाते हैं उनमें से ज्यादातर चीजें अम्लीय होती हैं जिससे एसिडिटी का जन्म होता हैं जिसके लक्षण हम ऊपर बता चुके हैं कि पेट में जलन होना, खट्टी-खट्टी डकारें आना, मुंह से खट्टा पानी आना आदि I

अब यह तो हो गयी हमारे शरीर की अम्लीयता यानिकी एसिडिटी धीरे-धीरे यही एसिडिटी बढ़कर हमारे खून में घुल जाती हैं जिसे कहते हैं ब्लड एसिडिटी यानिकी की खून की अम्लीयता और अच्छा समझे तो खून के अन्दर अम्ल की मात्रा का अधिक होना I और इसी अम्ल के कारण ही हमारे ह्रदय की नलिकायें जाम हो जाती हैं यानिकी ब्लॉक हो जाती हैं I जिसके कारण से रक्त का संचार सही तरीके से नहीं हो पाता और ह्रदयघात (हार्ट अटैक) आ जाता हैं I

 

कैसे पायें इस गंभीर बिमारी से छुटकारा

ह्रदयघात( हार्ट अटैक) की समस्या से निपटने के लिए हमें अपने भोजन और खाने पीने के सामानों में छारीय तत्वों की अधिकता को बढ़ा देना चाहिए क्योंकि विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही इस बात को मानते हैं कि अगर अम्ल और छार दोनों को एक दूसरे के साथ मिला दिया जाय तो न्यूट्रल हो जाता हैं I यानि की इनका इफेक्ट समाप्त हो जाता हैं I

 

इसीलिए महर्षि वागपट जी लिखते हैं जब कभी भी आपको मह्शूश हो कि आपके खून में या फिर शरीर में अम्ल की अधिकता हो रही हैं या फिर हो चुकी हैं आप तुरंत ही छारीय पदार्थों का सेवन शुरू कर दें I और अगर आप छारीय चीजों का सेवन शुरू कर देते हैं तो आपके शरीर और खून दोनों से छारीय तत्व क्रिया करके अम्ल को न्यूट्रल कर देंगे और इस तरह से आपके जीवन में कभी भी हार्टअटैक नहीं आयेगा और यह समस्या आपके जीवन से हमेशा-हमेशा के लिए दूर हो जायेगी I

यह तो रहा इसका इलाज और जानकारी कि क्यों आता हैं ह्रदयघात (हार्ट अटैक) और इसे कैसे कर सकते हैं अपने आप से दूर I

 

अब बात करते हैं कि कौन से तत्व हैं जिनमें सबसे अधिक मात्रा छार की होती हैं और किस चीज को हमें खाना चाहिए –

अगर हम अपने आस-पास की चीजों पर नजर दौडायें तो हमें ऐसी बहुत सी चीजें मिल जायेंगी जिनमें सबसे अधिक छारीय तत्वों की मजूदगी होती हैं जैसे कि –

जब कभी भी हमें एसिडिटी की शिकायत हो या फिर ह्रदयघात (हार्ट अटैक) की समस्या हो उस अवस्था में हमें तुरंत ही सबसे पहले लौकी का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए I क्योंकि हमारे आस-पास खाने की चीजों में सबसे अधिक छारीय तत्व लौकी के अन्दर ही विराजमान होते हैं I

हमें रोजाना 200-300 मिलीग्राम लौकी के जूस को पीना चाहिए इसके अन्दर सबसे अधिक छारीय तत्व मौजूद होते हैं I आप रोजाना सुबह खाली पेट 200-300 मिलीग्राम लौकी का जूस पीजिये और ह्रदयघात की चिंता से एसिडिटी जैसी बड़ी समस्या से बिलकुल मुक्त हो जाइए I

आप अगर लौकी के जूस को आज से पीना प्रारंभ कर देंगे तो 15-20 दिनों के अन्दर ही आपको फर्क महशूस होने लगेगा I और यह अंतर आपको साफ़ तौर पर दिखायी भी पड़ेगा I

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अगर आप इसे और अधिक पौष्टिक (और अधिक छारीय) बनाना चाहते हैं तो आप इसमें सेन्हा नमक, काला नमक भी मिला सकते हैं क्योंकि इनके भीतर भी केवल और केवल छारीय गुण ही विद्यमान होते हैं I ध्यान रहे नमक मिलाते समय आप ध्यान दें कि इसमें सेंधा नमक और काला नमक ही होना चाहिए सफ़ेद आयोडीन युक्त नमक नहीं I क्योंकि सफ़ेद नमक अम्लीय होता हैं I

 

इसके अलावा और जल्द ही लाभ अगर आप देखना चाहते हैं तो आप लौकी के जूस में 8 -10 तुलसी के पत्ते भी मिला सकते हैं I अगर घर पर तुलसी के पत्ते नहीं उपलब्ध हैं तो आप इस जूस में 8 – 10 हरे पुदीने के पत्ते भी मिला कर पी सकते हैं I

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अगर आपको कभी हार्टअटैक आ भी चुका हैं तो घबराने की कोई बात नहीं हैं आप आराम से आज से ही इस विधि का प्रयोग शुरू कर दीजिये 2-3 महीनों के लगतार प्रयोग के बाद आपको फिर कभी इस प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होगी I

 

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