बासी सब्जी में टमाटर का तड़का, टमाटर की मंहगाई से लग गया झटका

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मैनपुरी (ब्यूरो)- मैं कार्यालय में आकर बैठा ही था और कूलर की ठंडी-ठंडी हवा में जनपद के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ समाचार लिखने जा ही रहा था कि जमूरा महाराज घुमक्कड़ महाराज के साथ चैंबर का दरवाजा झटके के साथ खोलते हुये अन्दर आ धमके। आते ही दोनों ने हमे नमस्कार किया और सामने की कुर्सी पर बैठ गये।

मैंने घुमक्कड़ महाराज की ओर देखते हुये जमूरे से पूछा- मेरे जमूरे राजा! आज बड़े प्रसन्न मुद्रा में दिखाई दे रहे हो क्या किसी ने आज मुठ्ठी गर्म कर दी है? क्या बहुरानी ने आज तुम्हे खीर खिलाकर कार्यालय भेजा है?

जमूरा घुमक्कड़ महाराज की ओर देखते हुये मुझसे बोला- भाई साहब आज इस मंहगाई के युग में हम गरीब पत्रकारों को खीर का स्वादिष्ट भोजन कहा नसीब होगा। दो वक्त की रोटियां ही मिल जाये वहीं काफी है। बड़े अखबारों के पत्रकार नेताओ व माफियाओं की गोद में बैठकर रूपयों के न्यारे बारे कर रहे है और ये ही पत्रकार पत्रकारिता का अच्छा मजा चख रहे है।

मैंने घुमक्कड़ महाराज की ओर देखते हुये जमूरे से कहा- मेरे जमूरे राजा! तुम्हारी सोच सही नहीं है! हां कुछ पत्रकार जो सुविधा की पत्रकारिता करते है वो तो बड़े-बड़े नेता और माफियों से अपनी सुविधाओं के लिए धन जूटाने का धंधा करते है लेकिन बड़े रंगीन अखवारों के आदर्शवादी मिशन पत्रकारिता के पक्षधर सच्ची खबर लिखने वाले पत्रकार आज भी आर्थिक अभाव की जिंदगी जी रहे है। आज इन सच्ची खबरों के लिखने वाले पत्रकारों की वजह से ही लोकतंत्र जिंदा है। छोड़ो इन बातों को तुम अपनी खुशी का राज तो बताओ तुम आज इतने खुश क्यो हो?

जमूरा हंसते हुये बोला- दादा आज में इस बात से खुश हूॅ कि जब मैं शहर में समाचार के लिये घूमता था तो केवल शंकर होटल के सामने ही गौ माताओं का झुण्ड दिखाई देता था लेकिन आज तो हर होटल के सामने वासी सब्जी खाते हुये गायों का झुण्ड सुबह से ही दिखाई देने लगता है। जानते हो दादा ऐसा क्यों हो रहा है? आज कल टमाटर के भाव अचानक आसमान को छूने लगे है। टमाटर 100 रूपये किलोग्राम बाजार में बिक रहा है अब कोई भी होटल मालिक वासी सब्जी में टमाटर डालकर तडका लगाकर वासी सब्जी ग्राहको को नहीं परोस रहा है। वासी सब्जी में टमाटर का लगने वाला तड़का टमाटर की मंहगाई होटल मालिकों को मार गई हैं मंहगे टमाटर का तड़का अब होटल वालों को लग रहा है झटका।

बीच में घुमक्कड़ महाराज बोल उठे- दादा ऐ मुनाफाखोरी करने वाले होटल मालिक हर वासी सब्जी दाल में टमाटर डालकर तड़का इसलिए लगाते थे कि वासी सब्जी का खट्टा पन छिप जाये और लेकिन आज टमाटर तेज होने से अब कोई होटल मालिक दाल व सब्जी में टमाटर का तड़का नहीं लगाते और आजकल गौ माताओं को वासी सब्जी खाने का मजा मिल रहा है।

मैं जमूरा और घुमक्कड़ महाराज की बातों पर बडी जोर से हंसा और दोनो की ओर देखते हुये बोला- आज मैं मान गया हूॅ कि तुम दोनो खोजी पत्रकार हो मैं कुछ और कहता इसके पहले संपादक जी का बुलावा आ गया।

लेखन- दीपक शर्मा

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