केवल इनके ही दर्शन मात्र से मिलते हैं 23 तीर्थों के बराबर पुण्य

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http://gabzsoft.com/priority/avtobus-kiev-vrotslav-raspisanie.html автобус киев вроцлав расписание कहा जाता हैं कि भगवान् भोले नाथ शिव शंभू देवो के देव हैं इसीलिए उन्हें महादेव भी कहा जाता हैंI इस समय पूरी दुनिया से हिन्दू धर्म के मानने वाले लोग भगवान् शंकर की अमर गुफा यानिकी बाबा बर्फानी के नाम से मशहूर अमरनाथ गुफा के दर्शन करने के लिए भारत वर्ष और बाहर से भी यहाँ आते हैं I

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बाबा अमरनाथ का पवित्र शिवलिंग (photo credit -Wikipedia )
बाबा अमरनाथ का पवित्र शिवलिंग (photo credit -Wikipedia )

теория арт терапии ऐसी मान्यता हैं कि इस गुफा के दर्शन करने से मनुष्य को 23 पवित्र तीर्थों के पुन्य के बराबर पुन्य की प्राप्ति होती हैं I भगवान् शंकर की यह पवित्र गुफा धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर राज्य में हैं यही इसी गुफा में भगवान् भोले नाथ ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाइ थी I इस पवित्र के तीर्थ मात्र से ही श्रधालुओं को साक्षात् भगवान् भ्लेनाथ के दर्शन के जैसे सुख की प्राप्ति होती हैं I

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сколько калорий в зеленом перце दुनिया भर में भगवान् शंकर के जितने भी प्रसिद्द तीर्थ स्थान हैं उन सभी में अमरनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता हैं I आपको बता दें कि अमरनाथ की यह पवित्र यात्रा जुलाई महीने से प्रारंभ होकर अगस्त महीने में होने वाले हिन्दू पर्व रक्षा बंधन तक चलती हैं, प्रतिवर्ष इस यात्रा में भारत और भारत से बाहर से आये हुए करोंडो हिन्दू भक्त हिस्सा लेते हैं और भगवान् भोले नाथ के दर्शन का लाभ उठाते हैं I

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बाबा अमरनाथ जाते हुए श्रद्धालु
बाबा अमरनाथ जाते हुए श्रद्धालु (photo credit -Wikipedia )

http://tk-ubileiny.ru/priority/krem-dezinfitsiruyushiy-dlya-ruk.html крем дезинфицирующий для рук अमरनाथ यात्रा के बारे में लोगों की अपने-अपने अलग-अलग मत हैं कुछ लोग इस यात्रा को तो यहाँ तक कहते हैं कि इस यात्रा को करने से मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं, कुछ लोगों के अनुसार इस पवित्र धाम के दर्शन मात्र से ही 23 तीर्थों का अकेले पुण्य प्राप्त होता हैं I

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http://blacksheep.me.uk/library/belaya-metallicheskaya-koza-harakteristika.html белая металлическая коза характеристика आपकी जानकारी के लिए हम आपको यह बता दें कि यह एक चमत्कारिक शिवलिंग हैं जो कि पक्की बर्फ से अपने आप बन जाता हैं, गुफा के एक छोर गुफा में सुन्दर प्राकृतिक रूप से बना हिमशिवलिंग पक्की बर्फ का होता है जबकि गुफा के बाहर आपको मीलों तक कच्ची बर्फ ही देखने को मिलती है । और न केवल पक्की बर्फ से शिवलिंग का निर्माण होता हैं बल्कि गुफा में पक्की बर्फ से ही गणेश पीठ तथा पार्वती पीठ भी का भी निर्माण होता हैं।

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http://yavir2000.com/library/kari-volgograd-katalog-obuvi.html кари волгоград каталог обуви वैसे तो आप जानते ही हैं की समस्त भारत भूमि का तीर्थ है लेकिन कश्मीर को तीर्थों का घर कहा जाता है । आपको बता दें कि कश्मीर में 49 शिवधाम, 60 विष्णुधाम, 3 ब्रह्माधाम, 22 शक्तिधाम, 700 नागधाम हैं । बाबा बर्फानी की पवित्र अमरनाथ गुफा में स्थित पार्वती पीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है । अमरनाथ जी की यात्रा कैलाश मानसरोवर के बाद भारत में सबसे ज्यादा रोमांचक दूसरी यात्रा है । काशी में लिंगदर्शन एवं पूजन से दस गुणा अधिक फल देने वाला श्री अमरनाथ का पूजन है । देवताओं की हजार वर्ष तक स्वर्ण, पुष्प, मोती एवं पट्ट वस्त्रों से पूजा का जो फल मिलता है वह श्री अमरनाथ जी की इस लिंग पूजा से एक ही दिन में प्राप्त हो जाता है। एक दंत कथानुसार रक्षाबंधन की पूर्णिमा के दिन जो सामान्यत: अगस्त मास में पड़ती है भगवान शंकर स्वयं श्री अमरनाथ गुफा में पधारते हैं । रक्षा बंधन के दिन ही पवित्र छड़ी पवित्र गुफा में बने हिमशिवलिंग के पास स्थापित कर दी जाती है ।अमरनाथ यात्रा का प्रचलन ईसा से भी एक हजार वर्ष पूर्व का है । अमरनाथ गुफा में भगवान शंकर ने मां पार्वती को अमरकथा सुनाई थी ।

बाबा बर्फानी की गुफा के समीप श्रधालुओं के लिए लगे हुए टेंट (photo credit -Wikipedia )
बाबा बर्फानी की गुफा के समीप श्रधालुओं के लिए लगे हुए टेंट (photo credit -Wikipedia )

http://globalexecteam.com/library/kak-sdelat-zvukoizolyatsiyu-steni.html как сделать звукоизоляцию стены प्राचीन लेखों के अनुसार इस पावन गुफा की खोज बूटा मलिक नाम के मुसलमान गडरिए ने की थी । एक दिन वह भेड़ें चराते दूर निकल गया जहां उसकी एक साधु से भेंट हुई। साधु ने बूटा मलिक को एक कोयले से भरी कागड़ी दी । घर जाकर जब उसने देखा तो उस कागड़ी में सोना था जिसे देखकर वह हैरान हो गया । उस साधु का धन्यवाद करने वह वापस उस स्थान पर गया परन्तु साधु उसे मिला नहीं । उसने वहां एक विशाल गुफा देखी । उसी दिन से यह गुफा एक तीर्थ स्थान बन गई।माता पार्वती ने अमरकथा इसी गुफा में सुनी थी। इसी कारण देश-विदेश से हजारों की संख्या में शिव भक्त इस हिमशिवलिंग के दर्शन हेतु आते हैं । चातुर्मास की प्रतिपदा को हिमलिंग का निर्माण अपने आप प्रारम्भ होता है और धीरे-धीरे शिवलिंग का आकार ले लेता है तथा पूर्णिमा को परिपूर्ण होकर दूसरे पक्ष में घटने लगता है ।अमावस्या या शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को यह लिंग पूर्णत: अदृश्य हो जाता है। कुछ लोग इस किंवदंती को झुठलाते हैं । सत्य है कि हिमनिर्मित शिवलिंग कभी पूर्णतया लुप्त नहीं होता । आकार छोटा या बड़ा हो सकता है ।कहा जाता है कि भगवान शिव इस गुफा में पहले-पहल श्रावण की पूर्णिमा को आए थे इसीलिए इस दिन अमरनाथ की यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है । रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन) का सर्वाधिक महत्व होने से लोग इसी माह में यात्रा करते हैं ।पहलगांव की तरफ से इस यात्रा पर जाने से मार्ग में चंदनबाड़ी, शेषनाग झील, पंचतरणी के दर्शन होते हैं I

2016