दलितों की मसीहा थे बाबा भीमराव अम्बेडकर : डॉ. दिनकर त्रिपाठी

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रायबरेली। भारतीय संविधान निर्माता, दलितों, शोषितों और वंचितों के मसीहा भारतरत्न श्रद्धेय डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के 126 वीं जयंती ( 14 अप्रैल 2017 ) पर फ़िरोज गान्धी कालेज रायबरेली के उ.प्र.रा.ट.मु. विश्वविद्यालय इलाहाबाद अध्ययन केन्द्र ( S -442 ) में प्रातः 11:30 विषय “बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की वर्तमान समय में प्रासंगिकता ” विचार गोष्ठी हुई| कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. दिनकर त्रिपाठी (समन्वयक) ने की और कहा कि आज बाबा साहब के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा संविधान निर्माता के तौर पर या फिर उनके हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने या पूना पैक्ट की चर्चा कर ली जाती है। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि भारत में श्रमिकों के लिए काम के घण्टे तय किए जाने, विभिन्न सुविधाएं दिए जाने तथा कार्यशील महिलाओं को प्रसूति अवकाश की व्यवस्था के पीछे डॉ अम्बेडकर का ही हाथ था। मुख्य अतिथि .डा राजेश कुमार (विभागाध्यक्ष संस्कृत विभाग) ने कहा कि सभी धर्मो के ऊपर भारतीयता की भावना पहले और अंत तक हो ।

डा. अभय सिंह ने कहा – बाबा साहेब डॉ.अम्बेडकर जयंती के मायने देश में भारत के संविधान के तहत समता, स्वतंत्रता, न्याय, बंधुत्व स्थापित हो। डा. जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बाबा साहब का सपना था कि महिलाओं को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषो के बराबर समान अवसर और भागीदारी मिले। इस कार्यक्रम में लगभग 100 विद्यार्थी ने भाग लिया।

रिपोर्ट – राहुल यादव

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