पश्चिम बंगाल मुर्शिदाबाद के गरीब बच्चों के लिए शिक्षा की सबसे बड़ी उम्मीद हैं 17 वर्षीय बाबर अली

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babar ali

17 साल की उम्र में 12वीं में पढने वाले बाबर अली आज आनंद शिक्षा निकेतन में अपने दोस्तों के साथ मिलकर 800 से अधिक गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देते हैं, 9 साल की उम्र में बाबर ने पश्चिम बंगाल के बेरहमपुर में अपने घर के पीछे खाली पड़ी जगह पर अकेले ही इसकी शुरुवात की थी, उन माँ – बाप की दशा देखकर जो अपने बच्चों को स्कूल भेज पाने में सक्षम नही थे बाबर अली रोज स्कूल से आने के बाद घर के पीछे आंगन में बच्चों को पढ़ते थे, उनके स्कूल में बच्चे आस – पास के गांवों से आते थे |

जब अली ने देखा की स्कूल में आने वाले बच्चों की उपस्थिति नियमित नहीं है और लगातार गिर रही है तो इसके लिए भी उन्होंने एक तरकीब निकाली, अपने स्कूल में आने वाले वाले बच्चों की उपस्थिति को नियमित बनाने के लिए अली ने सरकारी अधिकारीयों से बात करके माह के अंत में स्कूल में चावल बटवाने की व्यवस्था की | चूँकि अली का स्कूल सरकार से मान्यता प्राप्त नही है इसलिए कुछ दिक्कतें आई पर उनके इस प्रयास को देखकर सरकारी अधिकारीयों ने भी उनकी मदद की |

अली के भविष्य के इरादे और भी बड़े और बेहतर है अली अपने स्कूल को देश के अन्य भांगों में विस्तृत करना चाहते हैं जहां बच्चे चाह कर भी आभाववश स्कूल नहीं जा पाते | लेकिन अभी वह सिर्फ अपने छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा का प्रबंध करना चाहते हैं |

2009 अली को उनके इस कार्य के लिए CNN-IBN न्यूज़ चैनल के रियल हीरो ऑफ़ इंडिया प्रोग्राम से इनाम भी मिल चुका है |

अखंड भारत परिवार बाबर अली के इस जज्बे को सलाम करता है और आशा करता है हम सब भी उनसे कुछ प्रेरणा ले सकें |

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