पुलिस की कार्यशैली से अबोध का जीवन हो सकता है संकटग्रस्त

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खीरों (रायबरेली ब्यूरो) : दिव्यांग और विक्षिप्त युवती के मामले को लेकर एसपी की फटकार और समाचार पत्रों में छपे समाचारों को पढ़कर बौखलाई खीरों पुलिस के हांथ भले ही दरिंदों को चिन्हित कर उन तक न पहुँच पाये हो। लेकिन नवजात बेटी को गोद लेने का ऐलान कर चुकी और उसकी परवरिश कर रही गड़रहन खेड़ा निवासिनी अमाला देवी पर सारी भड़ास निकाल दिया।

अमाला देवी ने बताया कि सीएचसी खीरों पहुंचे थाने के एक एसआई और कुछ सिपाहियों ने उसे यह कहते हुये धमकाया कि ज्यादा नेतागीरी करवा रही हो। मामले की पेपर बाजी कराने से कोई फायदा नहीं होगा। छोटे से मामले को तिल का ताड़ बना रही हो। जिस लड़की को तुम गोद लेना चाहती हो पहले अपनी सारी चल-अचल संपत्ति का आधा हिस्सा उसके नाम करो। तब वह तुम्हें मिलेगी। पुलिस की इस धमकी के आगे अमाला टूट गई और फूट-फूटकर रोने लगी। अमाला का कहना है कि मैंने सोंचा था कि इस विक्षिप्त युवती के साथ इस बेटी की परवरिश ठीक से नहीं हो पाएगी। बड़ी होकर इसकी शिक्षा दीक्षा और सारी जरूरतें कौन पूरी करेगा। इसे पढ़ा-लिखा कर किसी अच्छे घर में इसकी शादी कर दूँगी। जिससे इसकी जिंदगी अभिशाप न बने।

खीरों पुलिस की इस कार्यशैली से उसकी संवेदनहीनता झलकती है कि मानसिक रूप से विक्षिप्त और बाएँ हाथ से विकलांग नेत्रहीन युवती के साथ हुये दुराचार और उसके बाद बेटी के जन्म देने के मामले को खीरों पुलिस बहुत छोटा मामला बता रही है। जबकि पीड़िता के साथ ऐसा कई बार हो चुका है। क्योंकि पीड़िता एक वर्ष पूर्व भी एक बच्चे को जन्म दे चुकी है। जिसे किसी अज्ञात दंपति ने गोद ले लिया था और उसकी परवरिश कर रहे हैं। पुलिस की इस कार्यशैली से ग्रामीणों में व्यापक आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने नवजात बेटी को अमाला देवी को कानूनी तौर पर सुपुर्द किए जाने की मांग की है। थानाध्यक्ष खीरों रवीन्द्र कुमार मिश्रा ने अमाला के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।

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