तटबँधो की बुरी हालत, प्रशासन मौन

कुशीनगर(ब्यूरो)- जून के दूसरे पखवाड़े से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो जाएगा और अभी तक तटबंधों की मरम्मत का कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है। इससे बंधों की सुरक्षा को लेकर आसपास के गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।

गंडक नदी के एपी तटबंध पर पिपराघाट से अहिरौलीदान तक लगभग 17 किमी लंबाई में पिछले तीन वर्ष से नदी का दबाव बना हुआ है। इस बंधे के किनारे बसे गांव जंगलीपटटी, बिनटोली, घघवा जगदीश, जवही दयाल, परसा, बिरवट कोन्हवलिया, बाघाचौर, कचहरी टोला, बाकखास, नोनिया पट्टी, अहिरौलीदान के किसानों का खेत एपी तटबंध से सटा हुआ है।

बंधे पर उगने वाली मूज घास के पास चूहे बिल बना लेते हैं। बरसात से पहले अगर इस रैट होल को नहीं भरा जाता है तो वहां से पानी का रिसाव शुरू हो जाता है। कई बार ये रैट होल बंधे की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। इसके अलावा बरसात में बंधे को हुई क्षति को भी अगले साल बरसात से पहले ठीक कराना होता है।

15 जून के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है। उससे पहले अगर मरम्मत के ये कार्य पूर्ण नहीं होते हैं तो फिर बंधे पर खतरा बढ़ जाता है। बंधे के किनारे स्थित गांव के निवासी जेके सिंह, बाबूलाल निषाद, शर्मा यादव, मथुरा सिंह आदि का कहना है कि रेनकट और रैटहोल के चलते ही 31 जुलाई 2007 को घघवा जगदीश के पास एपी तटबंध कट गया था। तब 40 से अधिक गांवों को बाढ़ की तबाही झेलनी पड़ी थी। परंतु बाढ़ खंड डिविजन की तरफ से इस वर्ष अब तक कोई कार्य शुरू नहीं कराया गया है।

इस संबंध में बाढ़ खंड के सहायक अभियंता रमेश यादव का कहना है कि बंधे की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। बरसात से पहले संवेदनशील स्थानों पर मरम्मत का कार्य पूर्ण करा लिया जाएगा।

रिपोर्ट-राहुल पाण्डेय

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