बाँध की ख़राब स्थिति, बारिश की वजह से ग्रामीणों में चिंता बढ़ी

रेवती/बलिया(ब्यूरो)- घाघरा व टीएस बंधे की जंग शुरु होने में करीब डेढ माह का दिन शेष है। पहले एक डेंजर जोन तिलापुर था लेकिन नदी के रुख और टीएस बंधे की वर्तमान स्थित को देखने के बाद ग्रामीण मान कर चल रहे है कि भविष्य में घाघरा ने तांडव शुरु किया तो दतहा से तिलापुर व दतहा से भोपालपुर यानि पूरब और पश्चिम दोनों तरफ जहां भी बंधा कमजोर होगा वहां नदी का हैमरिंग तबाही मचा सकता है।

बचाव व सुरक्षा के मद्देनजर सिचाई विभाग की सक्रियता शून्य है।बीते वर्ष गंगा शबाब पर थी तथा घाघरा शांत थी।यही कारण है कि घाघरा की तरफ उतना ध्यान नही है जितना गंगा की तरफ है। 50 के दशक में स्थापित यह बंधा एक बार टूटने से 1971 में रेवती क्षेत्र में तबाही मचा चुका है तथा तीन दिनो तक लोग बाढ का कष्ट झेल चुके है जबकि दो बार टूटते टूटते बंधा बचा था। अब तक जितनी बार टीएस संकट में फंसा है, इसके पिछे विभागीय लापरवाही खुलकर सामने आयी है। इस बार भी उक्त लापरवाही ग्रामीणो को देखने को मिल रही है।

टीएस बंधे की सुरक्षा को लेकर चिंतित ग्रामीणो की अगर माने तो बंधे के दोनो साइड उगे सरपत मुज आदि के चपेट में है। हमेशा विभाग मानसून के पहले इसे मजदूरो से प्राथमिकता से साफ करता रहा है लेकिन इस बार विभाग मौन है।

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