बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण करने पर भारत की प्रधानमंत्री श्री मती इंदिरा गाँधी द्वारा संसद में जारी वक्तव्य

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नई दिल्ली,16 दिसंबर, 1971

“मुझे एक घोषणा करनी है ! पश्चिमी पाकिस्तान की सेना ने बिना शर्त बांग्लादेश में आत्मसमर्पण कर दिया है I आत्मसमर्पण के दस्तावेज पर ढाका में भारतीय प्रमाणिक समय के अनुसार आज 16:31 बजे पाकिस्तान पूर्वी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए. नियाजी और भारतीय तथा बांग्लादेश के पूर्वी रणस्थल में जी.ओ.सी. इन सी. लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोडा के द्वारा हस्ताक्षर कर आत्मसमर्पण स्वीकार किया गया है I अब ढाका एक स्वतंत्र देश की राजधानी है I

“यह संसद भवन और समूचा राष्ट्र इस एतिहासिक घटना पर ख़ुशी से झूम रहा है I बांग्लादेश का विजय की इस घडी में हम अभिवादन करते है I हम मुक्तिवाहिनी के युवा लड़ाकों के साहस और निष्ठा का अभिवादन करते है I

“हमें अपनी थल सेना, नौसेना और वायुसेना तथा सीमा सुरक्षा बल पर गर्व है, जिन्होंने अत्यंत शानदार तरीके से अपनी गुणवत्ता और क्षमता का प्रदर्शन किया I कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा और अनुसाशन सर्वविदित है I भारत उन वीर जवानों को हमेशा याद रखेगा, जिन्होंने इस संघर्ष में अपने जीवन की कुर्बानी दे दी I हम उनके परिवारों के साथ है I

“हमारे सशस्त्र बलों को हिदायत दी गयी है कि जेनेवा समझौते के अनुसार युध्बंदियों के साथ व्यवहार करना है और बांग्लादेश के लोगों के साथ मानवीयता से पेश आना है I मुक्तिवाहिनी के कमांडरों ने भी ऐसे ही आदेश दिए है I हालाँकि बांग्लादेश की सरकार को जेनेवा समझौते पर हस्ताक्षर करने का अवसर नहीं दिया गया है, लेकिन उन्होंने घोषणा की है कि वह पूरी तरह उसके नियम-कानून का पालन सम्मानपूर्वक करेगा I अब यह बांग्लादेश सरकार, मुक्तिवाहिनी और भारतीय सशस्त्र बलों की जिम्मेदारी है कि किसी भी प्रकार के बदले की भावना या हमले को न होने दिया जाय I

“हमारा लक्ष्य सीमित था, बांग्लादेश के लोगों और मुक्तिवाहिनी की सहायता करना, ताकि आतंक के शासन से वे अपने देश को आज़ाद करवा सकें और हमारी भूमि पर होने वाले किसी भी अतिक्रमण का प्रतिरोध करना I भारतीय सेना आवश्यकता समाप्त होते ही स्वदेश लौट आएगी I

“लाखों लोगों, जो सीमा पार अपने घरों से खदेड़े गए है, उनको वापस पहुँचाया जा रहा है I क्षतिग्रस्त इस देश के पुनर्स्थापित की जिम्मेदारी इस देश की सरकार व जनता के समर्पित दलों की है I

“हम आशा और विश्वास करते है कि इस नए राष्ट्र में उनके जनक शेख मुजीबुर्रहमान अपनी सही जगह लेंगे और शांति, सम्रद्धि व उन्नति के साथ बांग्लादेश का नेत्रत्त्व करेंगे I समय आ गया है वे एक साथ मिलकर ‘सोनार बांग्ला’ का सुनहरा भविष्य देखें I उन्हें हमारी अनेक शुभकामनाएँ I

“विजय सिर्फ उनकी नहीं है I मानवता की भावना को महत्त्व देने वाले सभी राष्ट्र इसे मानव की स्वाधीनता के लिए की गयी खोज में महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानेंगे I”

जय हिन्द, जय भारत !

श्रीमती इंदिरा गाँधी

प्रधानमंत्री भारत सरकार

साभार – मेजर जनरल रिटायर्ड शुभी सूद के द्वारा फील्ड मार्शल सैममानेकशा के ऊपर लिखी गयी किताब से

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