प्रदेश में सरकार बदलते ही न्यायालय की ओर से लगाई गई खनन पर रोक

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प्रतीकात्मक

जालौन ब्यूरो : प्रदेश में सरकार बदलते ही न्यायालय की ओर से लगाई गई खनन पर रोक के आदेश का पालन प्रशासन ने करना शुरू कर दिया है। न्यायालय के आदेश का पालन होने से बालू की खनन बंद हो गई है। जिसके कारण बाजार से बालू गायब हो गई है। बालू न मिलने के कारण निर्माण कार्य ठप्प हो गए हैं। तो वहीं, बालू न मिलने से निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों के पास कोई काम नहीं है। जिसके चलते मजदूरों के परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

सत्ता परिवर्तन होते ही प्रशासन की कार्यप्रणाली भी बदल गई है। न्यायालय की रोक के बाद भी दिन रात निकलने वाले बालू के ट्रकों पर सरकार बदलते ही रोक लग गई है। सरकार बदलते ही निजाम भी बदल गया है। जनपद में मध्य प्रदेश से आने वाले बालू के ट्रकों पर भी रोक लग गई है। प्रदेश व मध्यप्रदेश से आने वाली बालू पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाने के कारण बाजार में बालू उपलब्ध नहीं है। लगभग एक सप्ताह से बाजार में बालू न होने के कारण प्राइवेट व सरकारी निर्माण कार्य ठप्प हो गए हैं। निर्माण कार्य बंद होने के कारण बिल्डिंग मैटेरियल की दुकानों का भी व्यापार प्रभावित हो रहा है। बालू न होने के कारण गिटटी, ईंटा, सीमेंट की बिक्री ठप्प हो गई है। निर्माण कार्य ठप्प होने से दुकानदार परेशान हैं, तो वहीं, बालू न होने से निर्माण कार्य करने वाले मजदूर भी प्रभावित हो रहे हैं। निर्माण मजदूरों को बालू न होने के चलते कोई काम नहीं मिल रहा है। जिसके चलते मजदूरों के परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गयी है। इसके अलावा जो लोग अपने घरों में निर्माण कार्य करा रहे हैं, वह भी काफी परेशान हैं। किसी के यहां छत डलनी है, तो किसी के यहां प्लास्टर होना है। बालू न होने के चलते उनके यहां भी निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं।

बिल्डिंग मैटेरियल व्यापारी सुशील गुप्ता, अरूणकांत, प्रेम गुप्ता, दीपू गुर्जर आदि कहते हैं कि जब से बालू नहीं आ रही है तब से उनकी बिक्री बंद हो गई है। जिनके पास पहले से बालू रखी थी, वह भी अब समाप्त हो गई है। ऐसे में निर्माण कार्य न होने के चलते उनकी गिटटी, सीमेंट, आदि की बिक्री भी पूरी तरह से ठप्प हो गई है। मकान निर्माण करा रहे चतुर सिंह कुशवाहा, महेश सोनी आदि कहते है वह अपने मकान का निर्माण कार्य करा रहे थे। परंजु बालू न आने के कारण उनका निर्माण आधा, अधूरा पड़ा है। निर्माण मजदूर कल्लू कारीगर, जेपी चैधरी, सुलेमान, नीरज आदि कहते हैं कि उनका काम निर्माण कार्य करना है। ऐसे में जब कि बालू नहीं आ रही है, तो लोगों ने अपने निर्माण कार्य रूकवा दिए हैं। निर्माण कार्य न मिलने के चलते उनकी आमदनी भी ठप्प हो गई है। ऐसे में उनके परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। समाजसेवी सतेंद्र खत्री, विपुल दीक्षित, अशफाक राईन आदि कहते हैं कि सरकार को बालू खनन के लिए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए। जिससे लोगों के निर्माण कार्य भी न रूकें और सरकार को भी राजस्व की हानि न हो।

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव

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