खुल्ले सिक्के नहीं ले रही बैंक, पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत

महोबा(ब्यूरो)- सरकारी मुद्रा(खुल्ले सिक्के) को जहाँ आम आदमी अफवाह समझकर नहीं स्वीकार करता था। वहीं आम आदमी के सिक्के अब बैंको के न लेने से मुसीबत बन गया है।

बता दें, की कुछ ही दिन पहले हमने इस अफवाह की पड़ताल की जहाँ पर फरचून की दुकानदार के मालिक द्वारा यह बात भी सामने आई थी की न तो वह खुल्ले सिक्के लेगा और ना ही बैंक उससे लेता है। अब यह अफवाह है या फिर कोई आम लोगो को परेशान करने की साजिश या फिर बैंको की मनमानी।हमने सिर्फ अपनी पड़ताल मे यह साबित किया था जिसमें एक फरचून दुकानदार स्वंय सिक्के लेने से इंकार कर रहा था और बैंको का हवाला दे रहा था।लेकिन अब यह आम लोग के जरिऐ व परेशानी से यह साबित होता दिखाई दे रहा है। क्योंकि जहाँ पर एक ग्राहक युवक से ही बैंक ने सिक्के लेने से इंकार कर दिया।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक पीड़ित राहुल कुमार दीक्षित पुत्र राजेन्द्र प्रसाद दीक्षित ग्राम कैमाहा थाना कबरई का कहना है, की वह जब इलाहाबाद बैंक गया तो उसने कुछ रुपऐ व कुछ सिक्के जमा करने के लिऐ अपने नंबर का इंतज़ार किया जब उसका नंबर आया और उसने मौजूद ग्राहक खाता संख्या 21463579378 जिससे वह ग्राहक लेन देन करता रहा है अब उसने सिक्के जमा करने के लिऐ बैंक कर्मचारी को दिऐ तो उसने लेने से साफ इंकार कर दिया और बैंक कर्मचारी बोला की यह सिक्के बंद हो गऐ है और अब यह जमा नहीं होंगे, जमा करता ने यह बात सुन उसके पैर फूल गऐ और उसने यह बात साबित करने को कहा की अगर यह बंद हो गऐ होते तो इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई और अचानक कैसे यह हो सकता है।

पीड़ित अपने पिता राजेन्द्र प्रसाद दीक्षित के खाते मे वह रुपऐ जमा करने इलाहाबाद बैंक आया था जहाँ पर उसे सिक्के बन्द हो गऐ है, इस प्रकार की बात कर बैंक कर्मचारी द्वारा उसे वहाँ से जाने को कहा गया। पीड़ित बडे ही घबराहट व परेशानी के साथ इस बात की लिखित शिकायत कबरई थाना मे दे सख्त कार्यवाही की मांग की तथा जांच की भी गुहार लगाई। अब सवाल यह उठता है की जब बैंक नोटबंदी मे इस प्रकार के सिक्के ग्राहको को देती थी तो बिना सूचना के यह सिक्के कैसे बंद हो गऐ। इस तरह की बातकर बैंक कर्मचारी लोगो को गुमराह कर रहे है तथा सरकारी मुद्रा का बैंक कर्मचारी अपमान कर रही है। इससे तो आम लोग व छोटे दुकानदार जो अपनी रोजी रोटी दो चार पैसे कमा कर करते थे उन लोगो के लिऐ यह बेहद परेशानी की बात है। इस अफ़वाह व इस तरह की मनमानी को लेकर सरकार व प्रसाशन द्वारा रुख साफ होना चाहिए।

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