बसंत मेला एवं वार्षिकोत्सव पर कवि सम्मेलन आयोजित

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kavi sammelan
चकिया-नौगढ़ : चन्दौली महर्षि बाल्मीकि सेवा संस्थान देवघाट (देवखत)नौगढ़ मे सेवा संस्थान के वार्षिकोत्सव व बसंत पंचमी पर बसंत मेला के उपलक्ष्य मे महर्षि बाल्मीकि सेवा संस्थान की साहित्यिक इकाई आखर साहित्य चकिया द्वारा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया,जिसमे कवियो ने वहा मौजूद श्रोताओं को काव्य रस मे पूरी रात गोता खिलाया।

कवि सम्मेलन की शुरु होने से पहले मां सरस्वती व गुरु बाल्मीकि जी के चित्रो पर माल्यार्पण कर संस्थान के पदाधिकारी व आखर के वरिष्ठ जनो ने दीप प्रज्ज्वलित किया।कवि सम्मेलन की शुरुआत मनोज द्विवेदी “मधुर”के हे वेद गर्भा हे शब्द जननी ,सुर ताल लय से सजाने वाली, सरस्वती वन्दना के बाद शुरु हुआ,जिसमे बन्धु पाल “बन्धु” ने कहा कि झूक कर करै सलामी सबही घरवा वाली प्रधान हो गइल,तो संतोष सिंह श्रृजन ने कहा कि वह गौरय्या ही थी जो मुझे देख चहचहायी थी,जब मै पहली बार दुल्हन बन कर आयी थी,व सोने के दिन व चांदी के दिन,खुले दिन मे नंगे नहाने के दिन सुना कर उपस्थित लोगो को अपने बचपन के दिनो के बारे मे सोचने पर विवश कर दिया,वही उमेश चन्द्र द्विवेदी “दीन”ने कहा कि धूल मे मिलल सादगी बे पानी इमान भईल बा व सदा ही साथ मे तोहरे आजाद इन पावन सुनाया,फिर स्वतंत्र श्रीवास्वातव “नवल”ने अपनी रचना चाहे सूरज की राह फिर जाये चाहे बदरा मे चांद घिर जाये व ये पियवा सिमवां पर जहिया जइहा संगवा लिऔउले जहिया बना कर आपन सारथी सुना कर श्रोताओ की खुब तालिया बटोरी,फिर मनोज द्विवेदी “मधुर”ने एक के बाद एक रचनाएं सुनाकर सबको अपनी ओर आकर्षित करने पर मजबूर कर दिया उन्होनें सुनाया कि छोटी सी अपेक्षा है “सबका प्यार बनू मै,उर बीच रहू और पुष्पहार बनू मै ||”

दयानन्द तिवारी ने कहा कि हो गई है पर्वत सी पिघलनी चाहिए,इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए,आखर साहित्य के अध्यक्ष कृष्णा नन्द द्विवेदी “गुलाब” ने अपनी रचना को सुनाते हुए कहा कि गवई सहेलियां धिर न धरैली,बुढीया परोसिया देख के जरैली,वरिष्ठ साहित्यकार “सरस” जी अपनी बसंत रचना के माध्यम से सुनाया कि आवत ऋतु लागय खेतिया पियारी,खेत खेत नाचय ली फसल सुकुमारी,प्रसिध्द कवि व साहित्यकार प्रकाश लाल मीरजापुरी ने भी सामयिक काव्य पाठ सुनाते हुए कहा कि लहराई धरा हरि चुनरी सरसो पित सजाने लगी,और अन्त मे कवि सम्मेलन कि अध्यक्षता कर रहे बद्री प्रसाद मिश्र ने कहा कि करखा गये भूल ब्रिटेनिन के जब बीर जवाहर को परखा।देर रात तक चले कवि सम्मेलन का उपस्थित लोगो ने जम कर आनन्द उठाया,इस दौरान राधेश्याम द्विवेदी,राजनाथ सिंह,अवध विहारी मिश्र,राम किंकर राय,विजयानन्द द्विवेदी,रामकिशुन,बसन्त जी,रामवृक्ष कोल सहित कई लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रकाश लाल मीरजापुरी ने किया।

रिपोर्ट–दीपनारायण यादव

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