बौने साबित हो रहे है बिजली सुधार के तमाम प्रयास

प्रतीकात्मक फोटो

बलिया (ब्यूरो)- बिजली सुधार के तमाम प्रयास विभागीय उदासीनता के आगे बौने साबित हो रहे है। उदाहरण स्वरूप कस्बे की विद्युत व्यवस्था की बात की जाए तो आये दिन कहीं ना कहीं तार टूटकर गिर जाते है और उसे दुरूस्त करने में विभाग को दो से तीन दिन का समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में विद्युत अनापूर्ति से भीषण गर्मी में लोगों के तकलीफ का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

शनिवार को सायंकाल कसबा के दक्षिणी चट्टी पर टूटकर गिरे तार को सोमवार तक विभाग जोड़ नही पाया। जिससे कसबा क्षेत्र के दिलावलपुर ग्राम सभा रतसड़ खूर्द, दलित बस्ती व बाजार क्षेत्र की आधी आबादी अंधेरे में है जबकि तार जोड़ने के लिए विभाग के लाइनमैन, एसडीओ, जेई, लगायत अधिशासी अभियंता तक लोगों ने गुहार लगाई। कोई सुनने वाला नही है।

प्राइवेट लाइनमैनों के भरोसे होने वाली विद्युत आपूर्ति को दुरूस्त रखवाने में संबंधित उपभोक्ताओं को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। तार जोड़ने के लिए प्राइवेट लाइनमैनों को मुंह मांगा मेहनताना देना पड़ता है। 18घंटे गांवों को बिजली देने का सरकार का प्रयास जर्जर व्यवस्था के आगे निरर्थक साबित रहा है लोगों में बड़ी बहस है कि प्रदेश के उर्जा मंत्री के प्रभार वाले जनपद में जब यह स्थिति है तो अन्य जनपदों का हाल क्या होगा?

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