अपराध करो छुट्टा घूमो क्योंकि सरकार अपनी है

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आपकी बात- कस्बा कबरई हो या फिर कोई और क्षेत्र सबका आलम यही है कि अपराध करने वाले अक्सर बख्से जाते है और अपराध करने के बावजूद भी खुलेआम घूमते नजर आते है अपराधी।

आपको याद दिला दूं की यदि किसी भूतपूर्व सरकार मे अपराध होता था तो उस पर कार्यवाही जरुर होती थी चाहे देर मे सही लेकिन अब कोई भी अपराध हो चाहे रेपकर हत्या, फ़र्जीवाडा, राजस्व के नुकसान का या फिर भ्रष्टाचार का कोई भी अपराध हो सबके अपराधी खुलेआम अपना जलजला कायम करे हुऐ हैं| इस सरकार मे ऐसे अपराधी को अगर सह मिलती रहेगी तो इस सरकार की छवि खराब होने मे बढ़ोतरी तथा क्राइम को रास्ता मिलता रहेगा।

हमारे मुख्यमंत्री जी तो गरीबो तथा असहाय जनता की हितैशी है लेकिन शायद उनको यह जानकारी नहीं कि उनकी पीठ पीछे क्या खिचड़ी पक रही है| इसका अन्दाजा कोई नहीं लगा सकता और यही कारण है की पिछली सरकार से ज्यादा इस सरकार मे अत्याचार और भ्रष्टाचार बढ रहा है क्योंकि इसमें सबकी मिली भगत से काम होता है, जो कि अपराधी के पक्ष मे तथा बचाव मे और अगर न बचाव सही तो अपनी जुगाड़ से लेकिन अपना काम निकाल लेते है| फिर चाहे जिसका नुक़सान हो। इसके लिऐ प्रशासन भी मजबूर है उसके भी हाथ अपराध करने वाले के पक्ष के नेता से बधे होते है| ‘क्या करे सिस्टम ही ऐसा है?’ ऐसी ही बातों व हरकतो पर शासन व प्रशासन का ध्यान नहीं क्योंकि चाहे रेप का हो या फिर छेडखानी का या फिर किसी अन्य गंभीर घटना के अरोप का हो सब प्रशासन का न भय करके तथा अपनी जुगाड़ से खुलेआम घूम रहे है| जिसका असर अपराध बढने मे हो रहा है|

अब इन सबके जिम्मेदार कौन है? यह तो कोई नहीं जानता या फिर सब जानते है क्योंकि दोनों ही बातें समान है। इसलिए क्योंकि जनता तो भोली भाली है उसे जैसा पाठ पढा दिया जाता है उसपे ही चलने लगती है। क्या यही है इस सरकार का हंटर। क्या हो रही है सरकार को बदनाम करने की साजिश? या किया जा रहा सरकार से जुडे जुगाडी नेताओ द्वारा इस प्रकार का नाटक !

रिपोर्ट- प्रदीप मिश्रा

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