शराब के खिलाफ आंदोलन की आड़ में बड़ी साजिश, तोड़फोड़ और मारपीट के पीछे कौन है ‘मास्टर माइंड’ ?

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वाराणसी(ब्यूरो)-
शराब के खिलाफ शहर की सड़कों पर लगातार दूसरे दिन भी महिलाओं ने मोर्चा खोला। लाठी-डंडे से लैस आधी आबादी ने शिवदासपुर में चक्काजाम किया और नारेबाजी की। महिलाओं का खौफ ऐसा कि पुलिस उनके आगे नतमस्तक बनी रही। हंगामे और तोड़फोड़ के डर से शराब की दुकानों के मालिक थर-थर कांप रहे हैं। दूसरे भी दुकानों के शटर नहीं खुले। वहीं दुकान मालिकों ने महिलाओं के आंदोलन के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताई है।

आंदोलन की आड़ में कौन रच रहा है साजिश ?

एक ठेका मालिक ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए कुछ लोग इस तरह के आंदोलनों को बढ़ावा दे रहे है। उसके मुताबिक दुकानों को चलाने के लिए यूपी सरकार ने हमे लाइसेंस दिया है। इसके बदले हमने फीस चुकाई है। कानून के दायरे में रहकर शराब बेची जा रही है। अगर किसी को आपत्ति है तो वो कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। ठेका मालिक के मुताबिक में महिलाओं के आंदोलन के पीछे एक बड़ी साजिश है। बनारस के एक जनप्रतिनिधि इस तरह के आंदोलन को हवा दे रहे हैं और स्थानीय महिलाओं को भड़का रहे हैं। ठेका मालिक के अनुसार स्थानीय जिला प्रशासन भी उनकी मदद नहीं कर रहा है।

कानून हाथ में लेने का हक किसी को नहीं-

शराबबंदी को लेकर होने वाले संग्राम से पुलिस प्रशासन के भी होश उड़े हुए हैं। एसपी सिटी राजेश यादव के मुताबिक शराबबंदी के नाम पर किसी को कानून अपने हाथ में लेने का हक नहीं है। अगर शराब को लेकर किसी को आपत्ति है तो वह कानून का दरवाजा खटखटा सकता है। एसपी सिटी के अनुसार उनके पास अभी तक किसी तरह की तहरीर नहीं मिली है, अगर कोई लिखित शिकायत आती है तो जरुर कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिला आबकारी अधिकारी वाईआर यादव ने कहा कि जानबूझ कर ठेका मालिकों को टारगेट किया जा रहा है। सभी दुकानों को पास लाइसेंस हैं, ऐसे में तोड़फोड़ करना गैर कानूनी है।

शहर में महिला आंदोलन को लेकर हो रही है चर्चा-

शराबबंदी के खिलाफ महिलाओं के आंदोलन को लेकर शहर में बुधवार से ही चर्चा का बाजार गर्म है। बुधवार को महिलाओं ने मंडुवाडीह और चांदपुर में शराब ठेके पर जमकर तोड़फोड़ की गई थी। यही नहीं कुछ ठेकों को लुटने की भी कोशिश की गई है। महिलाओं का आरोप है कि स्थानीय पुलिस पैसे लेकर 24 घंटे शराब के ठेकों को खुलवाए रखती है। वहीं दूसरी ओर इस आंदोलन को लेकर तरह-तरह की चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि महिलाओं के आंदोलन को स्थानीय जनप्रतिनिधि बढ़ावा दे रहे हैं।

रिपोर्ट- सवॅश कुमार यादव
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