भदोही की मशीन मेड वाली यह  कालीन घूंघटवाली महिलाओं को दिलाएगी नयी पहचान 

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भदोही (ब्यूरो)- उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में पीएम मोदी के स्टार्ट-अप-इंडिया की सोच अब कुलांचे मारने लगी हैं। कौशल विकास और दूसरी योजनाओं के तहत युवक और युवतियों को स्वरोजगार परक प्रशिक्षण देकर उनकी जिंदगी सजाने और संवारने का काम सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ एनजीओ भी कर रहे हैं।

राज्य में योगी सरकार की कमान संभालने के बाद इस कड़ी में आने तेजी आएगी। दुनिया भर में खूबसूरत नक्काशीदार एवं बूलबूटेदार कालीनों के लिए मशहूर भदोही की ग्रामीण महिलाएं नयी सुबह के साथ नई उड़ान भरने को बेताब हैं। ग्रामीण अंचल में गांव की महिलाओं की कलाईयों में जहां कभी खूबसूरत रंग बिरंगी चूडियां खनकती थीं अब उन हाथों में टफडेड होगा और मशीनमेड कालीन में रंगों की सुनहली आकृति उभरेगी।

पूर्वांचल के देशी मैम और गांव की गोरी के हाथ से बनी मशीन मेड कालीन विदेशी मैम यानी यूरोपियन और अमेरिकन देशों में विदेशी मैडम के घरों की शोभा बनेगी। जी हां! पूर्वांचल में अपने कार्यो की वजह से पहचान बनने वाली संस्था डा. शंभूनाथ सिंह शोध संस्थापन यह बीड़ा उठाया है। प्लान इंडिया के तहत गांव की महिलाओं और युवाओं को मशीनमेड यानी टफटेड बुनाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

नई अर्थ्ब्यावस्था में प्रतिस्पर्धी बनकर उभर रहा है भारत –
भारत वैश्विक अर्थव्यस्था में नई चुनौती और प्रतिस्पर्धी के रुप में उभर रहा है। ऐसे में हम अपनी परंपरागत उद्योगों को संरक्षित कर दुनिया में अपना नया मुकाम हासिल कर सकते हैं। भदोही का नाम पूरी दुनिया में वैसे भी नक्काशीदार कालीनों के लिए मशहूर है। यहां की कालीन अमेरिकी राष्टपति के सरकारी आवास यानी व्वाइट हाउस में भी लगी है।

प्लान इंडिया के परियोजना प्रबंधक महेंद्र शुक्ल ने बताया कि औराई ब्लाक में गांव के युवाओं और युवतियों के साथ किशोरियों को स्वरोजगार परक प्रक्षिण के लिए 34 समुदायों के चार स्थानों पर यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें घमहापुर, इटवां, सेउर और मुक्तापुर गांव शामिल हैं। प्लान इंडिया में प्रशिक्षण के लिए संस्था की तरफ से युवतियों और युवाओं का चयन किया जाता है। बाद में टेनरों की तरफ से उन्हें टेनिंग दी जाती है। इसका पैकेज तीन माह का होता है। यह प्रशिक्षण  19 जून तक चलेगा।

ट्रेनिंग के बाद प्रक्षिणार्थी अगर अपना खुद का स्वरोजगार चुनना चाहता है तो चुन सकता है। इस योजना के तहत गांव के बेगार युवाओं और घरेलू महिलाओं को कई तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। संस्था महिलाओं को मशीनमेड कालीन बुनाई प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें बैंक से कर्ज भी उपलब्ध करती है। अगर वह चाहती हैं की उनका भी स्वरोजगार हो तो संस्था ऐसे लोगों की पूरी मदद करती है।

भदोही के हैंडमेड कालीन की कभी अलग पहचान थी। गांव-गांव काठ कालीन चलते थे और रात दिन कालीन बुनाई के पंजों से टप-टप की संगीत मय धुन सुनाई पड़ती थी। लेकिन अब वह दौर खत्म हो चला है। हैंडमेड की जगह टफटेड यानी मशीनमेड काली ने नयी जगह बना ली है। हलांकि इस तरह के ट्रेनिंग सेंटर कालीन नगरी के सुरियावां और अभोली ब्लाकों में पहले से संचालित हैं।

लेकिन अभी उसका कुछ बेहतर परिणाम नहीं आया है। घरेलू महिलाओं को स्वालंबबी बनाने के लिए प्लान इंडिया की तरफ से चलाया जा रहा कौशल विकास कार्यक्रम अपने आप में अनूंठा उदाहरण है। यह गांव की महिलाओं की सूरत और सिरत दोनों बदलने में कामयाब होगा। पूर्वांचल की कालीन नगरी को यह नया मुकाम दिलाएगा।

रिपोर्ट-राजमणि पाण्डे़य

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