भागवताचार्य ने भक्तजनों को सुनाई भगवत्कथा

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जालौन(ब्यूरो)- कलियुग बीते सतयुग, त्रेता तथा द्वापर तीनों युगों से महान है। पूर्व में युगों में जो फल लोगों को हजारों वर्ष की तपस्या व पूजा-अर्चना से प्राप्त होता है, वही फल कलियुग में लोगों को बस जरा से प्रयास में मिल जाता है। परंतु आवश्यकता है कि प्रभु का जो भी ध्यान किया जाए वह निःस्वार्थ भाव से किया जाए। यह बात उक्त बात पुराना अस्पताल मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अंतिम दिन कथाव्यास पं. विमल क्रष्ण पाठकजी ने उपस्थित श्रोताओं के समक्ष कही।

बाजार बैठगंज में पुराना अस्पताल मैदान में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतिम दिन व्रंदावन धाम से पधारे भगवताचार्य पं. विमल क्रष्ण पाठकजी ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने उपस्थित भक्तजनों को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर अपने भक्त को बिन मांगे ही सब कुछ दे देता है। जैसे सुदामा को बिन मांगे ही सब कुछ मिल गया। भगवान् अपने भक्त के लिए हमेशा ही तत्पर रहते हैं। सिर्फ उन पर विश्वास करने की जरूरत है। सुदामा जी के दरिद्र होने पर उनकी पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर सुदामा अपने बालसखा श्रीकृष्ण से कुछ मांगने की इच्छा लिए उनसे मिलने द्वारिकापुरी जाते हैं। लेकिन श्रीकृष्ण के भव्य महल व राजसी ठाठ-बाट देखकर वह संकोच में पड़ जाते हैं। वह श्रीकृष्ण को अपने आने का उद्देश्य भी नहीं बता पाते हैं। लेकिन भगवान् तो अपने भक्तों के मन तक की बात को भली-भांति जानते हैं। श्रीकृष्ण ने जान लिया कि सुदामा किस उद्देश्य से उनसे मिलने आए हैं। जिस पर उन्होंने सुदामा के कुछ मांगे बिना ही उन्हें सबकुछ दे दिया। जब सुदामा अपने घर पहुंचते हैं, तो वहां की कायाकल्प देखकर पर भौंचक्के रह जाते हैं। इसके उपरांत कथा-शास्त्री द्वारा कलियुग का चरित्र वर्णन किया गया।

उन्होंने कहा कि कलियुग बीते सतयुग, त्रेता तथा द्वापर तीनों युगों से महान् है। पूर्व में युगों में जो फल लोगों को हजारों वर्ष की तपस्या व पूजा-अर्चना से प्राप्त होता है, वही फल कलियुग में लोगों को बस जरा से प्रयास में मिल जाता है। परंतु आवश्यकता है कि प्रभु का जो भी ध्यान किया जाए वह निःस्वार्थ भाव से किया जाए। कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं में भागवत कथा की पारीक्षित श्रीमती शीला देवी, वीरेंद्र सिंह, नरेंद्र प्रताप सिंह, प्राग सिंह, हरी ताम्रकार, रामशरण महाराज, संजय सिंह, शिवमंगल सिंह, ब्रजभूषण सिंह, नीलम देवी, सरिता सिंह, प्रीति सोनम देवी, रचना देवी आदि सहित लगभग एक सैकड़ा भागवत प्रेमियों ने आस्था के साथ कथा को सुनकर जीवन में अच्छे कर्मों को अपनाने की प्रेरणा ली।

रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव
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