भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत बहाल, जल्द ही मिल सकते है दोनों देशों के विदेश सचिव

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इस्लामाबाद- भारत और पाकिस्तान ने अपने संबंधों में आए गतिरोध को खत्म करते हुए बुधवार को एलान किया कि उन्होंने ‘समग्र’ वार्ता करने का फैसला किया है जिसमें शांति एवं सुरक्षा और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा शामिल होगा। पेरिस में दस दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच मुलाकात के बाद से दोनों देशों के बीच कई सकारात्मक घटनाक्रम देखने को मिले। बुधवार को घोषणा की गई कि दोनों देशों के विदेश सचिव वार्ता के तौर-तरीकों और कार्यक्रम पर फैसला करने के लिए मुलाकात करेंगे।

पाकिस्तान ने भारत को मुंबई हमले की सुनवाई को ‘जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए इसे तेज करने के लिए कदम उठाए जाने’ का भरोसा दिलाया है। भारत लंबे समय इस मामले को जल्द निष्कर्ष तक ले जाने के लिए दबाव बनाता आ रहा है। भारत और पाकिस्तान की ओर से जारी साझा बयान में कहा गया है कि हाल ही में बैंकॉक में मुलाकात करने वाले दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आतंकवाद से जुड़े मुद्दों का निदान करना जारी रखेंगे।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और विदेश मामलों के सलाहकार सरताज के साथ मुलाकात के बाद यह साझा बयान जारी किया गया। सुषमा यहां अफगानिस्तान पर आयोजित एक बहुपक्षीय सम्मेलन में शिरकत के लिए दो दिवसीय पाकिस्तान दौरे पर पहुंची थीं। साझा बयान के मुताबिक, ‘समग्र द्विपक्षीय वार्ता’ में परस्पर विश्वास बहाली के कदम, सियाचिन, सर क्रीक, वुलर बराज तुलबुल नौवहन परियोजना, आर्थिक व वाणिज्यिक सहयोग, आतंकवाद विरोधी लड़ाई, मादक पदार्थों पर अंकुश, मानवीय मुद्दे, जनता के बीच परस्पर आदान-प्रदान और धार्मिक पर्यटन के मुद्दे भी शामिल होंगे।

दोनों देशों के इस साझा बयान में आतंकवाद की निंदा की गई है और इसका खात्मा करने के लिए सहयोग का संकल्प लिया गया है। सुषमा और अजीज ने बैंकॉक में आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सफल बातचीत का उल्लेख किया और यह फैसला किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आतंकवाद से संबंधित सभी मुद्दों का निवारण करना जारी रखेंगे। अजीज के साथ साझा पत्रकार सम्मेलन में सुषमा ने कहा कि अजीज और शरीफ दोनों के साथ उनकी ‘बहुत अच्छी मुलाकात’ हुई। उन्होंने कहा कि हमने नए सिरे से बातचीत आरंभ करने का फैसला किया है जो पहले समग्र वार्ता के तहत चल रही थी और इसे समग्र द्विपक्षीय वार्ता (सीबीडी) करार दिया।

विदेश मंत्री ने कहा, ‘सीबीडी के पास समग्र वार्ता के सभी घटक होंगे और इसमें कुछ अतिरिक्त अवयव भी होंगे। इस बातचीत की प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाना है इस बारे में हमारे विदेश सचिवों की बैठक में फैसला किया जाएगा। विदेश सचिव इस प्रक्रिया के तौर-तरीके और कार्यक्रम पर काम करेंगे’। उन्होंने कहा, ‘कार्यक्रम तय करने का मतलब यह है कि कौन से घटक होंगे, कब, क्या तौर-तरीके और कौन से सचिव बातचीत करेंगे। इसमें समग्र वार्ता में शामिल बातों के अतिरिक्त भी कुछ अवयव होंगे’।

इससे पहले सुषमा ने पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए कहा कि दोनों देशों के लिए समय आ गया है कि वे एक दूसरे के साथ मिलकर काम करने के लिए ‘सूझबूझ और आत्मविश्वास’ दिखाएं क्योंकि दुनिया बदलाव की दिशा में बढ़ रही है। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को उसी गति से सहयोग देने का भी प्रस्ताव दिया, जिसपर वह सहज हो।

अफगानिस्तान के मुद्दे पर आयोजित मंत्री स्तरीय सम्मेलन हार्ट आॅफ एशिया में विदेश मंत्री ने कहा, ‘इस अवसर पर मैं पाकिस्तान की ओर भी हमारा हाथ बढ़ाना चाहूंगी। समय आ गया है कि हम एक-दूसरे के साथ काम करने के लिए सूझबूझ और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करें और क्षेत्रीय व्यापार व सहयोग को मजबूत करें। पूरा विश्व इंतजार कर रहा है और बदलाव की जमीन तैयार कर रहा है। हम उन्हें निराश न करें’। सुषमा के साथ विदेश सचिव एस जयशंकर, पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त टीसीए राघवन और अफगानिस्तान में भारत के राजदूत अमर सिन्हा भी थे। सुषमा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उस देश में आतंकवाद की तीव्रता और क्षेत्र दोनों में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भारत अफगान सरकार के साथ मिलकर उसकी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए काम करने को तैयार है।

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