भीमाशंकर – जानें आखिर भगवान भोलेनाथ शंकर को क्यों पुकारा जाता है इस नाम से

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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान् भोलेनाथ के द्वादस ज्योतिर्लिंगों में से एक है I भोलेनाथ का यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे से तक़रीबन 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है I कहा जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग का नाम भीमाशंकर इसलिए पड़ गया क्योंकि भगवान् शंकर ने यहीं पर रावण के परम प्रतापी भाई कुम्भकरण के इकलौते पुत्र का वध किया था I चूँकि भगवान् भोलेनाथ ने इसी स्थान पर भीम का वध किया था इसलिए इस स्थान पर भगवान् भोलेनाथ को भीमाशंकर के नाम से जाना जाता है I

जानें पौराणिक कथा क्या कहती है –

कहा जाता है कि एक समय जब कुम्भकरण धरती पर विचरण कर रहा था उस समय यहीं पुणे के निकट ही किसी पर्वत पर एक सुंदरी दिख जाती है जिसका नाम कर्कटी होता है I कुंभकरण को कर्कटी से प्रेम हो जाता है और वह उससे विवाह कर लेता I कुछ समय बाद कुंभकरण लंका वापस चला जाता है और इसी बीच कर्कटी गर्भवती हो जाती है जिस कारण वह कुंभकरण के साथ लंका नहीं जाती और इसी काल में भगवान् श्री राम का रावण के साथ भयंकर संग्राम होता जिसमें सम्पूर्ण रावण का खान-दान विभीषण को छोड़कर सभी मारे जाते है I

जब इस बात की जानकारी कुंभकरण की विधवा कर्कटी को होती है तो वह बहुत ही अधिक क्रोधित होती है और उसे देवताओं के द्वारा छले जाने का भय भी सताने लगता है I इन्ही कारणों से कर्कटी अपने पुत्र जिसका नाम भीम होता है उसे लेकर सुदूर एक वन में चली जाती है और उसे शस्त्र आदि की शिक्षा देने लगती है तथा उसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ योद्धा बनाने का प्रयास करती है I भीम ने भगवान् ब्रम्हा जी की तपस्या करके दुनिया भर के अस्त्र प्राप्त कर लेता है और जिसके कारण वह तीनों लोकों को जीतने के लिए चल देता है I

उसके आतंक से देव और मनुष्य भयभीत हो जाते है I इसी बीच कामरूप नगर के महाराज के बारे में भीम को पता चलता है और वह उसे मारने के लिए उनके धावा बोल देता है I भीम कामरूप नगर के महाराज जोकि भगवान् शंकर के बहुत ही बड़े भक्त थे उनसे कहता है कि वह भोले नाथ की तपस्या को छोड़कर उनकी पूजा अर्चना करे लेकिन राजा ने उसके इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया I राजा के इस तरह के अस्वीकार करने के बाद भीम ने उसे बंदी बनाकर अपने कारागार में बंद कर दिया जहाँ भी राजा ने एक शिवलिंग बनाकर भोले नाथ की पूजा करना प्रारंभ कर दिया I

भीम को यह बात ठीक नहीं लगी और उसने तुरंत ही राजा को मारने के लिए अपनी कृपान उठा ली तभी भगवान् भोलेनाथ वहां पर प्रकट हो गए और उन्होंने अपने त्रिसूल से भीम का वध कर दिया I भगवान् भोलेनाथ मरते हुए भीम को वरदान दिया कि जबतक इस धरती पर जीवन रहेगा तब तक इस स्थान और इस मंदिर को भीमाशंकर के ही नाम से जाना जाएगा I

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