भू-जल संचयन के सम्बन्ध में चिंतन आवश्यक- सी.डी.ओ.

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सुलतानपुर (ब्यूरो)- मुख्य विकास अधिकारी रामयज्ञ मिश्र ने कहा कि भू-जल संचयन के सम्बन्ध में हमें चिंतन करने की आवश्यकता है। हम सभी का प्रयास होना चाहिये कि पेयजल का दुरूपयोग न हो। उन्होंने कहा कि यदि भू-जल संचयन न हुआ तो तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिये होगा। इसके लिये हमें सचेत रहने की आवश्यकता है। ताकि आने वाली पीढ़ी को पेयजल की समस्याओं का सामना न करना पड़े। मुख्य विकास अधिकारी आज विकास भवन में भू-जल संचयन के सम्बन्ध में आयोजित जनपद स्तरीय गोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि रिचार्ज के लिये ग्रामीण क्षेत्रों के कुओं को जीवित रखना पड़ेगा तथा तालाबों को कम से कम 10 फिट गहरा करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें खेतों में मेड़ बनाकर वर्षा जल का संचय करना होगा। उन्होंने कहा कि भू-जल संचयन एक सतत् प्रक्रिया है, इस पर हमें चिंतन करने की आवश्यकता है। हम यूकिलिप्टस पौध के रोपण को बढावा ने दें क्योकिं यूकिलिप्टस का पेड़ अधिक पानी खीचता है, उसकी जगह हम आम, नीम, सागौन आदि वृक्ष के रोपण को बढ़ावा दें।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि अनियन्त्रित एवं अनियोजित दोहन के परिणाम स्वरूप भू-जल स्तर में व्यापक गिरावट एवं भू-जल की उपलब्धता में कमी आयी है। उन्होंने कहा कि जल के बगैर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसे अपनी आने वाली पीढ़ी के लिये सजों कर रखें तथा जल की सतत् एवं सुरक्षित उपलब्धता के लिये भू-जल प्रबन्धन एवं वर्षा जल संचयन करें।

गोष्ठी को समाजसेवी सत्यनाथ पाठक, सहायक अभियन्ता डी.आर.डी.ए. दिनेश दूबे, सी.वी.ओ. अजीत सिंह आदि ने सम्बोधित किया। गोष्ठी को संचालन सहायक अभियन्ता लघु सिचाई राजीव मिश्रा जिला सूचना अधिकारी आर.बी.सिंह, जिला कृषि अधिकारी विनय वर्मा, अटेवा के संरक्षक बृजेन्द्र त्रिपाठी आदि ने सम्बोधित किया तथा संचालन भानु प्रकाश ने किया।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा 

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