भूपेश बघेल का दिल्ली बुलावा, आज दे सकते है इस्तीफ़ा, कांग्रेस की राजीनीति में बड़ा उलटफेर

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नई दिल्ली
: छत्तीसगढ़ प्रभारी हरिप्रसाद के इस्तीफे के बाद हाईकमान ने देर रात्रि प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को सुबह दिल्ली बुलाया है,बताया जा रहा है आज भूपेश बघेल इस्तीफ़ा दे सकते है।काँग्रेस चुनाव हारने के बाद बड़ी सर्ज़री करने का मन बना लिया है।

गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में नए चेहरे पेश करने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन उनके साथ साथ कई राज्यों में पुराने क्षत्रपों के बने रहने की संभावना है। पार्टी के जानकार नेताओं का कहना है कि कई राज्य ऐसे हैं, जहां कांग्रेस अपने प्रादेशिक क्षत्रपों के दम पर ही टिकी हुई है। इसलिए राहुल गांधी उनके साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

मिसाल के तौर पर उत्तराखंड में कांग्रेस की कमान हरीश रावत के पास रहेगी। वैसे भी उत्तराखंड में कांग्रेस के पास अब नेता नहीं बचे हैं। उसके ज्यादातर नेता पाला बदल कर भाजपा के साथ चले गए हैं। सो, रावत को बनाए रखने की मजबूरी है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में भी वीरभद्र सिंह को बनाए रखने की कांग्रेस की मजबूरी है। वहां कहा जा रहा है कि कांग्रेस इस बार भी वीरभद्र के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

हो सकता है कि राहुल गांधी मिलिंद देवड़ा को मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बना दें। लेकिन महाराष्ट्र की कमान पुराने नेताओं में से ही किसी के हाथ में रहेगी। हालांकि राहुल के करीबी सांसद और यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजीव सातव को कमान देने की चर्चा है, लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी के पुराने नेता इसका विरोध कर सकते हैं। वहां पार्टी के पास अब भी चार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण, सुशील शिंदे और नारायण राणे सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस को मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को बनाए रखने की मजबूरी है। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में 45 सीटें जीतीं, इसके पीछे लेफ्ट के साथ एलायंस से ज्यादा अधीर चौधरी का हाथ था। उनके मुकाबले का कोई दूसरा नेता कांग्रेस के पास है भी नहीं। केरल में कांग्रेस के सर्वोच्च नेता एके एंटनी ही रहेंगे। उनके नीचे ओमन चांडी और रमेश चेन्निथला के बीच संतुलन बनाया जाएगा।

नए चेहरे को प्रदेशों में कमान सौंपना चाहते है राहुल गांधी

कांग्रेस के प्रदेश संगठनो को लेकर विचार मंथन चल रहा है।कई राज्यो में नै टीम भी बनानी है।पार्टी के शीर्ष नेताओ को लग रहा है की कुछ प्रदेश के लगभ सारे नेता विफल साबित हुए है।
मध्यप्रदेश,गुजरात,छत्तीसगढ़,उत्तर प्रदेश,बिहार,महाराष्ट्र आदि राज्यों में पार्टी के नेता भाजपा या दूसरी क्षत्रपों के आगे लाचार दिखे है। इसलिए पार्टी को इन राज्यों में नए नेताओं की जरुरत है। हालांकि कई राज्यों में नए नेता भी सफल नहीं हुए है।राहुल गांधी का मुम्बई में संजय निरुपम का प्रयोग भी सफल नहीं हो रहा है।बताया जा रहा है कि राहुल गांधी बिलकुल नए चेहरे को प्रदेशों में कमान सौपना चाहते है।

रिपोर्ट- हरदीप छाबडा
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