BPL परिवारों को गाय देने की योजना में करोड़ों का घोटाला, गरीब जनता को दीं बीमार गायें…

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झारखण्ड सरकार नवे बड़े जोर-शोर से प्रदेश में ब्प्ल परिवारों को गायें देकर उनका उद्धार करने की यजना बनाई, लेकिन सरकार की इस योजना का कुछ ही महीने में दम निकलता नजर आ रहा है, जिन परिवारों को ये गायें मिली हैं, उनकी अब फिक्र है कि वो गायों को क्या खिलाएं और खुद क्या खाएं ? उनका कहना है कि इन गायों को पालने में उनकी बची-खुची खेतीबाड़ी भी बिक जाने का खतरा है |

सरकार की योजना के तहत राज्य में हर बीपीएल परिवार को 90 फीसदी सब्सिडी पर 6-6 महीने के अंतराल पर दो गाय उपलब्ध कराई गयीं, दावा किया गया कि ये गाय हर दिन 10 से 15 लीटर दूध देंगी जिससे बीपीएल परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा. लेकिन अब कई परिवारों का आरोप है कि उन्हें बीमार गाय थमा दी गईं है, ये गाय दिन में सिर्फ 2 से 3 लीटर दूध ही दे रही हैं, ऐसे में गायों को खिलाने में ही इन परिवारों का दम निकल रहा है, ऊपर से बीमार गायों के इलाज का खर्च अलग से सिर पर आ गया है |

सरकार की ओर से इस योजना के लिए 12 अरब रुपये का प्रावधान किया गया. इसमें हर गाय के लिए 45 हजार रुपये और रहने के शेड के लिए 15 हजार रुपये तय किए गए. सरकार की मंशा राज्य के 20,000 बीपीएल परिवारों को गाय के जरिए लाभ पहुंचाने की थी, अकेले रांची में ही डेढ़ हजार परिवारों को ये गाय बांटी जानी थीं, अभी तक यहां जिन 150 परिवारों को गाय मिली हैं उनके लिए दुश्वारियां कम होने की जगह और बढ़ गई हैं, ऐसी शिकायतें हैं कि इस योजना में अफसरों और बिचौलियों की मिलीभगत से करोड़ों के वारे-न्यारे किए गए हैं |

लोगों के मुताबिक झारखंड के गव्य निदेशालय की ओर से शुरू की गई इस योजना में शंकर, साहीवाल और सिंधी नस्ल की गाय दिए जाने का वादा किया गया था. लेकिन उन्हें घटिया नस्ल की गाएं सौंप दी गईं, इस योजना में इन गायों को खरीदते समय ही डॉक्टर से जांच कराकर 3 साल के बीमा का भी प्रावधान किया गया. इस बीमा खर्च का 10 फीसदी भी लाभार्थी परिवारों से लिया जाना है, ऐसी भी शिकायत आईं कि कुछ गायेंतो खरीदने के महज पंद्रह दिनों के अंदर मर गईं. ऐसी स्थिति में बीमा का लाभ भी नहीं मिलता, बीमा कवर 15 दिनों के बाद शुरू होता है |

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