लखीसराय में भगवान बुद्ध पर बड़ी खोज शुरू, चीनी यात्री व्हेनसांग ने भी किया लखीसराय जिक्र

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लखीसराय : शुक्रवार को भारतीय पुरातत्व विभाग, पटना की टीम ने प्रखंड के उरैन ग्राम स्थित पहाड़ की तलहटियों में ऐतिहासिक महत्व के बौद्धकालीन अवशेषों की तलाश में खुदाई का कार्य शुरू किया। इसके पूर्व प्रोजेक्ट के निदेशक डॉ. गौतमी भट्टाचार्य, अधीक्षण पुरातत्वविद कृष्णचंद श्रीवास्तव, असिस्टेंट आर्कियोलाजिस्ट नीरज कुमार मिश्रा, उरैन के पैक्स अध्यक्ष सुबोध कुमार एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार ने खुदाई स्थल पर पूजा-अर्चना कर फावड़े के साथ खुदाई कार्य की औपचारिक शुरुआत की।

खोज के लिए उरैन ग्राम का ही क्यों चयन किया इस सवाल पर असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट श्री मिश्रा ने बताया कि उरैन ग्राम निवासी तत्कालीन आइजी फजल अहमद ने 90 के दशक में कई बार अन्वेषण के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने उरैन के ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया था। वर्तमान में शांति निकेतन पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर अनिल कुमार ने भी यहां के ऐतिहासिक अवशेष की जानकारी दी थी। उन्होंने आगे बताया कि चीनी यात्री व्हेनसांग की नालंदा विश्वविद्यालय में रखी डायरी में लखीसराय जिले के उरैन सहित लय, श्रृंगी ऋषि, सरसंडा पहाड़, नोनगढ़ आदि कई स्थलों की चर्चा की गई है। वहीं उरैन पहाड़ भी इस बात की पुष्टि करता दिखता है जिसकी सतह पर आज भी दर्जनों बौद्धकालीन स्तूप और भगवान बुद्ध की मूर्ति उकेरी गई है।कई ग्रामीण बताते हैं। उरैन ग्राम और खेतों में आज भी कुआं खुदाई और हल जोतने के दौरान मूर्तियों का निकलना आम बात है। ग्रामीण ऋषिकेश बताते हैं खुदाई स्थल के निकट पहले सुरंग था जो बचपन से देखते आ रहे थे। बाद में धीरे-धीरे भर गया।पुरातत्व विभाग की खुदाई के बाद क्या-क्या हासिल होगा फिलहाल ये तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन इस कार्य से ग्रामीणों में कौतूहल का माहौल है।

रिपोर्ट – रजनीश कुमार

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