ग्राम प्रधानों. कोटेदारों और शिक्षकों की मिलीभगत से चल रहा बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ उजागर

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प्रतीकात्मक
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सुलतानपुर : कोटा चयन को लेकर हुए फर्जीवाड़े में एक ऐसा खेल सामने आया है कि आप देख कर दंग रह जाएंगे। दरअसल कोटा में फर्जीवाड़ा करने वाले ग्राम प्रधान व कोटेदार ने शिक्षा विभाग के कर्मियों से मिलकर इस कदर खेल किया कि प्राथमिक विद्यालय खुलने के एक वर्ष पहले की तारीख में ही पांचवी पास की टीसी बनवा ली। इस संबंध में एसीजेएम तृतीय पूनम निगम की अदालत ने आरोपी प्रधान व कोटेदार समेत अन्य के खिलाफ एफ आईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए है।

बता दें कि, मामला बल्दीराय थाना क्षेत्र के भखरी गांव का है। जहां के रहने वाले शिव बहादुर मिश्रा ने एसीजेएम तृतीय की अदालत में 156(3) दप्रसं के अंतर्गत प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें आरोप है कि उनके गांव में बीते एक जुलाई को कोटा चयन के प्रस्ताव को लेकर पंचायत भवन पर बैठक बुलाई गई।

इस दौरान ग्राम प्रधान सत्यदेव की अध्यक्षता में बैठक चली। जिसमें प्रधान ने अपने पसंदीदा कोटेदार राम स्वरूप के समर्थन में ग्रामीणों से वोट मांगा। वहीं गांव के ही मनोज ने भी राशन की दुकान का लाइसेंस पाने के लिए अपना आवेदन पेश किया, लेकिन इस दौरान ग्राम प्रधान ने षड़यंत्र के तहत आवश्यक कागजातों को बाद में दाखिल करने व इस संबंध में सूचना देने की बात कही, पर अभियोगी व आवेदक मनोज को अभिलेख दाखिल करने की न कोई सूचना दी गई और न ही इस संबंध में कोई जानकारी ही किसी को उपलब्ध कराई गई। ग्राम प्रधान ने अपने कोटेदार रामस्वरूप का गांव के ही प्राथमिक विद्यालय भखरी से पांचवी पास का स्थानांतरण प्रमाण-पत्र भी जाली तरीके से बनवा लिया।
प्राथमिक विद्यालय से जारी किए गए स्थानांतरण प्रमाणपत्र में रामस्वरूप को 20 मई 1962 की तारीख में उत्तीर्ण दर्शाया गया है और उनके प्रवेश का दिनांक 30 जुलाई 1957 बताया गया है। इसी टीसी के आधार पर रामस्वरूप को साक्षर दर्शाते हुए नियुक्ति अधिकारियों को भी धोखा देकर प्रधान व कोटेदार ने खेल कर गलत ढंग से कोटे का लाइसेंस अपने पक्ष में प्राप्त कर लिया। इस खेल का खुलासा तब हुआ जब शिवबहादुर मिश्रा ने खंड शिक्षा अधिकारी बल्दीराय से जन सूचना मांगी। दरअसल एबीएसए की दी गई जनसूचना में यह बताया गया है कि रामस्वरूप सुत बुधराम निवासी भखरी 1962 में कक्षा 5 पास किए ही नहीं है, बल्कि यह भी चौंकाने वाला खुलासा किया कि प्राथमिक विद्यालय भखरी 1963 में खुला।

ऐसे में विद्यालय खुलने के पहले टीसी जारी करने का सवाल ही नहीं बनता। फर्जीवाड़े की जानकारी होने पर अभियोगी शिवबहादुर ने थानाध्यक्ष व एसपी समेत अन्य को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग की, लेकिन जिले की पुलिस ने प्रभावशाली प्रधान व कोटेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा। पुलिस से हारकर अभियोगी अदालत पहुंचा तो न्यायाधीश पूनम निगम ने संज्ञान लेते हुए आरोपी ग्राम प्रधान सत्यदेव व कोटेदार राम स्वरूप एवं अन्य आरोपियों खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने के संबंध में थानाध्यक्ष बल्दीराय को आदेशित किया है।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा

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