बिहार बोर्ड की चौपट व्यवस्था में ही फंस गया आर्ट्स टॉपर गणेश

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बिहार(रा.ब्यूरो)- बिहार बोर्ड की चौपट व्यवस्था में ही फंस गया गणेश।जी हां,कभी भ्रष्ट व्यवस्था का लाभ उठाकर शिक्षा माफिया द्वारा टॉपर बनाने का खेल चलता था लेकिन इस बार व्यवस्था की खामी का ही शिकार बन खुद फंस गया गणेश।आईये समझने की कोशिश करते हैं दरअसल हुआ क्या?

गणेश कुमार, गणेश राम के नाम से गिरिडीह से 1990 में ही मैट्रिक कर चुका है, 1975 के जन्मतिथि पर, लेकिन उसे नौकरी नही मिली, वह ननबैंकिंग का काम करने लगा, इसमें कुछ लोगों के पैसे डूब गए, फिर गणेश से वे लोग पैसे वापस का दबाब देने लगे तो वह घर से निकल गया, और समस्तीपुर में ही रहने लगा और इसी बीच उसने यह तरकीब सोची कि स्टेट बदल कर फिर से क्यों न उम्र कम करके फिर से मैट्रिक, इंटर कर लिया जाय और इसी आधार पर उसे अच्छी नौकरी मिल सकती है।

उसने यही किया भी, वह वाकई आर्थिक रूप से कमजोर था, उसकी मंशा कतई नही थी कि वह टॉपर बन जाए, लेकिन उसका दुर्भाग्य ही था कि चूंकि उसकी हैंडराइटिंग अच्छी थी, उसे मूल्यांकन की गरबरी से उम्मीद से ज्यादा अंक मिल गया, हिंदी में 92 मिलना लगभग असंभव होता है, लेकिन उसे इतना अंक मिल गया चूंकि कापी जांचने वाले मिडिल और प्राइमरी स्कूल के टीचर थे, उन्हें एक दिन में 500 से 800 कापियों की जांच की जिम्मेदारी थी, इसी में गलती हुई और सिर्फ अच्छी हैंडराइटिंग देख उसे लगभग सभी विषयों में अच्छे मार्क्स मिल गए, म्यूजिक में 65 मिलना तो सामान्य सी बात है, 68 तक मिलता है, म्यूजिक के रिटेन में तो उसे 30 में सिर्फ 18 ही मिला।

इधर जेनेरल छात्रों को कम अंक मिला, इसी वजह से गणेश संयोगवश टॉप कर गया, और यही से उसकी उलटी गिनती शुरू हो गयी। अगर वह टॉप नही करता तो वह कहीं भी पकड़ में नही आता। क्योंकि अपनी कद काठी और वेशोभूषा से 42 साल का आदमी 24 साल का गणेश कुमार बनकर इतनी टाइट व्यवस्था, वीक्षक और सीसीटीवी को भी चकमा देकर अपने प्रयास में सफल भी हो गया, लेकिन उसका नसीब ही खराब था कि वह टॉप हो गया।

अब उसपर फर्जीवाड़े की प्राथमिकी दर्ज हो गयी, वह गिरफ्तार हो गया है, रिजल्ट रद्द कर दिया गया, इस कॉलेज की मान्यता भी रद्द कर दी गयी और अब आगे भी कार्रवाई की जा रही है।

रिपोर्ट-नसीम रब्बानी

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