बिल से निकला शिवलिंग वर्तमान में बिल्लेष्वर के रूप प्रख्यात है

0
134


पुरवा/उन्नाव (ब्यूरो)-
बिल्लेष्वर मन्दिर पौराणिक स्थल है यह मन्दिर किसी के द्वारा स्थापित नही है। ऐसा भी लोग मानते है कि यह मन्दिर इतनाधि स्थल है कि जो लोग जो भी इच्छा लेकर आते है पूरी होती है दूसरे यह भी चर्चा है कि मूर्ति आज तक बगैर पूंजी हुई किसी किसी को नही मिली। वैसे अगर देखा जाये तो पुरवा तहसील में यह प्राचीन मन्दिर स्थल को बहुत पहले प्रर्यटक स्थल के रूप में घोषित हो जाना चाहिये था जो आज तक नही हो पाया।

प्राप्त विवरण के अनुसार पुरवा तहसील हेड कवाटर से सटे विषालकाय बिल्लेष्वर मन्दिर में सावन के प्रत्येक सोमवार को उमड़ता है। श्रद्धालुओं का जन सैलाब बिल्लेष्वर मन्दिर प्रांगण में छोटे बड़े 27 मन्दिर स्थापित है मन्दिर परिसर में पक्का तालाब जिसमें कमल खिले हुये है जिनका एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है।

लोगो की जुबानी जो तथ्य सामने आये है बताते है कि द्वापर युग में एक बार श्रीकृष्ण भगवान और अर्जुन दोनो ही लोग राजा मौरध्वज की परीक्षा लेने के लिये उनकी राजधानी जा रहे थे देर रात्रि होने के कारण राजधानी से कुछ दूरी पर उन्होंने शिविर बनाकर विश्राम किया सुबह प्रातः उठने के बाद अर्जुन ने अपना धनुष उठाकर पृथ्वी पर चलाया और पानी की व्यवस्था करके उसमें दोनो ही लोगो ने स्नान किया उसके बाद मिट्टी का शिवलिंग बनाकर शिवअर्चना किया तत्पष्चात चले गये कालन्तर में यह शिवलिंग वही पड़ रहा |

कलयुग में एक दिन बन्जारो का एक समूह अपनी गाय चराते हुये वहां पहुंचे फिर क्या एक निर्जन स्थान पर दूध देने वाली गाय का सारा दूध अचानक शिवलिंग पर गिर गया यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा गाय चराने वाले बन्जारे भी हैरत जदा थे | बताते है कि एक दिन स्वपन में भगवान शंकर ने बंजारे को अपने अस्तित्व के बारे में बताया |

स्वप्न देखकर बन्जारा परेशान हुआ तो इसकी सूचना अगल बगल के गांवो में दी गयी फिर उस स्थान पर खोदाई करते समय एक बिल से काले पत्थर के रूप में पवित्र शिवलिंग की प्राप्ति हुई जिसको उसी स्थान पर चौकी बनाकर स्थापित किया गया और पूजन साधना के क्रम चालू हुये तथा लोगो की मन्नते पूरी होने लगी और आस्था बढ़ती गयी धीरे-धीरे आज उक्त स्थान पर 27 शिववालय बन गये और पक्का तालाब जिसका खूबसूरत नजारा देखने के लिये तथा मन्दिर से आस्था रखने वाले जिनकी मुरादे पूरी होने पर लोगो को जमावड़ा हमेशा लगा रहता है |

आज उपरोक्त स्थल बिल्लेष्वर बाबा के नाम से प्रख्यात है| बिल से निकला हुआ शिवलिंग महान स्थल के रूप में जगजाहिर है | जहां सावन के सोमवार तथा शिवरात्रि को विशाल मेला एवं भण्डारे का आयोजन होता है | भगवान भोलेनाथ के द्वार पर माथा टेकने वालो की सभी मुरादे पूरी होती है | वही लोगो का यह भी कहना है कि इस स्थान के शक्ति का इससे भी पता चलता है कि जिस किसी ने बुरी नियत से अहित करने का प्रयास किया व सुरक्षित नही रहा जिसकी कई मिसाले मौजूद है | फिर हाल मिर्जापुर सुम्हारी निवासी कल्लू साहू ने मन्दिर परिसर की बाउण्ड्री वाल तथा मन्दिरो को पेन्ट कराया गया जिससे सुरक्षा व सुन्दरता दोनो बढ़ गयी है।

रिपोर्ट- मोहम्मद अहमद (चुनई)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here