बलिया वासियों ने 92 का इतिहास दोहराने की जतायी आशंका

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बलिया (ब्यूरो)- संघ परिवार ने 25 नवम्बर को लाखों की भीड़ इकट्ठा करके कुछ अनहोनी की बिसात अयोध्या में बिछा दिया है। यह तब है जब ”बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि“ का विवाद माननीय उच्चतम न्यायालय में सतत सुनवाई की प्रक्रिया में है। देश के शांतिप्रिय नागरिकों का मत है कि दोनों पक्षों को उच्चतम न्यायालय के निर्णय का इंतजार कर लेना चाहिए। वे इस बात को लेकर स्तब्ध व चिंतित है कि देश में सद्भावना और शांति का माहौल बिगाड़ने का कुछ संगठन व लोग उस्साहसिक प्रयास कर रहे हैं।

बलिया के कतिपय शांतिप्रिय संगठन व समाजिक सरोकार रखने वाले प्रबु (व्यक्तियों ने माननीय उच्चतम न्यायालय को मेमोरैडम भेजकर निवेदन किया है कि वह केन्द्र व उत्तर प्रदेश सरकार को स्वयं संज्ञान लेकर उन्हें पाबंद करने की व्यवस्था करे कि बलात 1992 की दुर्घटना को दुहराया न जा सके तथा सद्भावना में खलल न पड़ने पाए।

मेमोरैउम भेजने वालों में मुख्यतः आईना सामाजिक समिति के डॉ0 एम0 इलियास, पीयूसीएलद्ध नागरिक स्वतंत्रता जन संगठन के जिला अध्यक्ष रणजीत सिंह, एडवोकेट, सी0पी0एम0 के राजनेता कामरेड राम कृष्णा यादव, एडवोकेट, नवचेतना समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह एडवोकेट तथा भारतीय सद्भावना मिशन, बलिया के संरक्षक डॉ0 हैदर अली खां है। चीफ जस्टिस आफ इंडिया, उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली के भेजे गए मेमोरैडम की प्रतिलिपि राष्ट्रपति उ0प्र0 के राज्यपाल, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के प्रधान न्यायधीश, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्प संख्यक आयोग तथा पी0यू0 सी0एल0 के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सूचना कि तथा आवश्यक कार्यवाही हेतु भी भेजी गयी है।

रिपोर्ट- अजित ओझा

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