बिन पानी सुनी हुई नहरें, किसानों की पेशानी पर पड़ा बल

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रतसर/बलिया : रतसर -सुखपुरा नहर में पानी न आने से किसानों के खेतों की सिचाई महीनों से बाधित है जिससे किसानों में भारी नाराजगी है। गेहूं बुवाई का असली समय समाप्त होने को है लेकिन बहुत से किसान अभी बुवाई के लिए पानी का इन्तजार कर रहे है। अधिकारियों की संवेदन शून्यता के चलते नहरों में पानी ना छोड़े जाने से जो गेहूं की फसल बोई गई है वह भी खराब होकर सूखने लगी है। नहरों में अब तक पानी न आने से गेहूं की अंकुरित फसल की सिचाई बाधित है। अगर शीघ्र पानी न छोड़ा गया तो किसान जन आंदोलन के लिए बाध्य होगें।

बताते चले कि क्षेत्रीय किसान धान की फसल कटने के तुरन्त बाद ही गेहूं की बुवाई इसी आस पर करने लगे कि खेत की नमी जब तक है बुवाई हो जाएगी तो आने वाले समय में नहर द्वारा पहली सिंचाई कर ली जाएगी। विगत अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नहर में पानी नही आया और जब गेहूं की बुवाई का समय आया तो नहर की सफाई होने लगी। सक्षम किसान तो संसाधनों का प्रयोग कर सिचाई में लगे है लेकिन ज्यादातर किसान नहरों के पानी पर ही आश्रित है। जनऊ पुर गांव के सेवानिवृत्त कृषि प्रवक्ता श्री प्रेमनारायन पाण्डेय ने बताया कि सात दिसम्बर के बाद गेहूं की बुवाई होने से फसलो के उत्पादन पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ेगा। क्षेत्र के किसान हृदयानन्द पाण्डेय, सुधाकर पाण्डेय, करीमन राम, शिव प्रसाद पाण्डेय, कोकिल राम ने बताया कि शीघ्र नहरों में पानी नही छोड़ा गया तो गेहूं की फसल प्रभावित होगी। अगर अधिकारी समय रहते सक्रिय नही हुए तो हम आंदोलन के लिए बाध्य होगे।

रिपोर्ट – धनेश पाण्डेय

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