गहमर बवालः भाजपा उम्मीदवार सुनीता सिंह के देवर समेत कई को पुलिस ने उठाया

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गाजीपुर(ब्यूरो)– गहमर थाना मुख्यालय पर हमले के दूसरे दिन रविवार की सुबह आसपास के इलाके में सन्नाटा है। मुख्य सड़क की ज्यादातर दुकानें बंद हैं। जगह-जगह पुलिस, पीएसी के जवान मौजूद हैं। थाना मुख्यालय में अधिकारियों का आना-जाना लगा है। एसपी ग्रामीण अनिल कुमार कैंप कर रहे हैं। थाना के भीतर कंप्यूटर रूम में टूटे-फूटे बिखरे उपकरण, फर्नीचर उपद्रवी भीड़ की कारस्तानी की गवाही कर रहे हैं। पुलिस रात में ही उपद्रवियों की पहचान कर छापामारी की। करीब 16 लोगों को उनके घरों से उठाई। उनमें जमानियां की भाजपा उम्मीदवार सुनीता सिंह के देवर रघुवीर सिंह तथा उनके समर्थक मुन्ना सिंह बाउल, राजेश सिंह पिंटू, विवेक कुमार, सुजीत कुमार वगैरह भी शामिल हैं। इनमें कई को दूसरी जगह भेज दिया गया है।
एसपी ग्रामीण ने बताया कि शुरुआती आकलन में विभाग को दस लाख रुपये से अधिक की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। उस संपत्ति में थाना मुख्यालय के कंप्यूटर रूम में रखे तोड़े-फोड़े गए उपकरण के अलावा फूंके गए चीता दस्ते की बाइक, एसओ की बोलेरो, जेनरेटर, फर्नीचर इत्यादि है। साथ ही यूपी-100 की गाड़ी के शीशे, उपकरण वगैरह भी तोड़े गए हैं। थाना मुख्यालय के बाहर खड़े तीन ट्रक को भी आग के हवाले कर दिया गया। उनमें एक ट्रक पर लदे सूखे फल, इलेक्ट्रिक सामान खाक हो गए। ग्रामीणों की मानी जाए तो थाने पर हमले की यह पहली घटना है। इसके पीछे ताड़ीघाट-बारा मार्ग की बदहाली मुख्य वजह है और निश्चित रूप से इसके लिए जनप्रतिनिधि कसूरवार हैं।
बिहार के रास्ते भूसी लाद कर आ रहा ट्रक राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पास गड्ढे में पलट गया। बाइक से गुजर रहा गांव का युवक सोनू खरवार सहित दलित बस्ती का राजकुमार(6), प्रियंका(6) तथा इरशाद(25) ट्रक के नीचे आ गए। आसपास के लोग ट्रक से भूसी गिरा कर ट्रक के नीचे दबे उन सभी को बाहर निकाले लेकिन तब तक राजकुमार की मौत हो चुकी थी। उस बीच सड़क पर यातायात पूरी तरह रुक गया था। दो सिपाहियों के साथ एक एसआई मौके पर पहुंचे। ग्रामीण उन पर भड़क गए। कहने लगे कि यही पुलिस वाले पैसे लेकर ओवरलोड ट्रकों को इस सड़क से गुजरने दे रहे हैं। इससे आए दिन हादसे हो रहे हैं। साथ ही वह पुलिस वालों को मारने के लिए लपके। पुलिस वाले किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाए। उसके बाद भीड़ थाने पर धमकी।
भीड़ का गुस्सा भांप यूपी-100 का चालक गाड़ी थाने में लेकर चला गया लेकिन भीड़ उसे घेर ली। गाड़ी से खींच कर उसकी वर्दी वगैरह फाड़ डाली। गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। उपकरण नोच दिए। फिर भीड़ घटनास्थल पर पहुंची। तभी एसओ यादवेंद्र पांडेय घटनास्थल पर पहुंचे। उन्हें भी भीड़ दौड़ाई। एसओ थाने में घुसे। पीछे से आई भीड़ थाना के कंप्यूटर रूम में घुस कर तोड़फोड़ करने लगी। उसी क्रम में एसओ की गाड़ी में आग लगा दी। कैंपस में चीता दस्ते की और एक सिपाही की बाइक सहित आपराधिक मामले में जब्त दो बाइक को भी आग के हवाले कर दी। फिर भीड़ थाने से बाहर निकली और खड़े तीन ट्रकों को भी फूंक दी।
उस दौरान गांव का युवक सेराज ने भीड़ को ऐसा करने से मना किया तब भीड़ में शामिल कुछ युवक उसकी जमकर पिटाई कर दिए। यह सब घटनाक्रम करीब डेढ़ घंटे तक चला। सूचना मिलने पर आसपास के थानों की फोर्स मौके पर पहुंचनी शुरू हुई। तब भीड़ गायब हो चुकी थी। कुछ देर बाद डीएम संजय कुमार खत्री, एसपी सुभाषचंद्र दूबे, एसपी ग्रामीण अनिल कुमार, एसडीएम राजकुमार, सीओ रामदरस यादव वगैरह पहुंचे। उसके बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू की। बेशक एसओ यादवेंद्र पांडेय धैर्य से काम लिए। अगर पुलिस जवाब में गोली दागी होती तो हालात और बिगड़ते। थाने पर हमले के वक्त पुलिस कर्मी इधर-उधर दुबक कर अपनी जान बचाए।

रिपोर्ट-डा०विजय प्रकाश यादव
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