जनसंघ के संस्थापक की जन्म जयंती पर भाजपाइयों ने किया नमन

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लालगंज/रायबरेली (ब्यूरो) जनसंघ के संस्थापक व हिन्दुस्तान और हिन्दुत्व के प्रबल चिन्तक पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्म जयंती भाजपा नेताओं के द्वारा बडे ही हर्षाल्लास के साथ मनायी गयी। भाजपा नेता पूर्व मंत्री गिरीस नारायण पाण्डेय, रविनन्दन सिंह चौहान, राजेश सिंह फौजी, दीप प्रकास शुक्ला, जेपी सिंह, बीके सिंह, संतोष पाण्डेय, सोनू मिश्रा, आनन्द त्रिपाठी, आसीस बाजपेयी, सिवम गुंप्ता, चन्द्रसेखर शरण सिंह, पसुपति शंकर बाजपेयी, राम प्रताप सिंह, नागेन्द्र गुप्ता, निखिल पाण्डेय, पंकज जायसवाल, जनार्दन सिंह, सुरेश श्रीवास्तव, राजेश मिश्रा, रामदेव पाल, हरीशंकर पाण्डेय आदि भाजपाइयों के द्वारा डा. यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण करते हुये नमन किया गया।

कार्यक्रम का संचालन भाजपा के जिला सहमीडिया प्रभारी सुसील शुक्ला के द्वारा व आभार प्रदर्शन अध्यक्षता कर रहे सैनिक प्रकोष्ठ के प्रान्त सहसंयोजक राजेश सिंह फौजी के द्वारा किया गया। जन्म जयंती कार्यक्रम में बोलते हुये दीप प्रकाश शुक्ला ने कहा कि डा. मुखर्जी ने जीवन भर राष्ट्रवाद व हिन्दू विचारधारा के प्रति समर्पित होकर कार्य किया। भाजपा नेता हरीशंकर पाण्डेय ने डा. मुखर्जी को योग्यतम व संघर्षशील व्यक्ति बताते हुये कहा कि जन्म से लेकर 52 वर्ष की उम्र तक लगातार राष्ट्र सेवा मे डा. साहब लीन रहे। जन संघ की स्थापना से पहले देश की स्वतंत्रता के लिये भी डा. साहब ने जीवन पर्यन्त कार्य किया। वे अखण्ड भारत व हिन्दूहित के प्रबल चिन्तक थे। जनसंघ की स्थापना उनके द्वारा हिन्दूवादी सोच को लेकर की गयी थी। आज जनसंघ भारतीय जनता पार्टी के रूप मे वट वृक्ष की तरह पूरे हिन्दुस्तान मे सेवाभाव को लेकर कार्य कर रही हैं। उन्होने भारत सरकार से डा. मुखर्जी के एजेण्डे कस्मीर से धारा 370 हटाने, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिसा मे काम करने की मांग की। कार्यक्रम मे राम मन्दिर निर्माण की भी भारत सरकार से मांग की गयी।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व विधि एवं न्याय मंत्री गिरीस नारायण पाण्डेय ने कहा कि आरएसएस के द्वितीय सरसंघचालक गुरूजी से प्रेरणा लेकर डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की थी। पं. दीनदयाल उपाध्याय व अटल बिहारी बाजपेयी के सहयोग से डा. मुखर्जी ने जनसंघ को पूरे हिन्दुस्तान मे फैलाने का बखूबी कार्य किया था। पूर्व मंत्री ने डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को प्रखर राष्ट्रवादी चिन्तक, राजनीतिज्ञ और महान शिक्षाविद बताते हुये कहा कि डा. मुखर्जी एक राष्ट्र और दो विचारधारा के सदैव विरोधी रहे। इसी विरोध के चलते बिना वीजा के वे जम्मू कामीर गये जहां पुलिस के द्वारा उन्हें जेल में डाल दिया गया। जेल में ही डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की असामायिक देहावसान हो गया। उनकी संदिग्ध मौत से जनसंघ सहित पूरे हिन्दुओ मे उस समय मातम छा गया था। पूर्व मंत्री ने कहा कि जम्मू कमीर के लिये डा. मुखर्जी ने अपनी आहुंती देदी क्योंकि डा. मुखर्जी ने जम्मू कमीर को भारत की मुख्य धारा मे जोड़ने के लिये अनुच्छेद 370 व परमिट प्रणाली का विरोध किया था। अनुच्छेद 370 व परमिट प्रणाली न हटाये जाने के चलते ही आज जम्मू-कश्मीर पूरी तरह आतंकवाद से जूझ रहा है। भारत का कानून उनकी विधानसभा मे पारित हुये बिना जम्मू कमीर में लागू नहीं होता है। पूर्व मंत्री श्री पाण्डेय ने भी डा. मुखर्जी के एजेण्डे व सोच को भारत सरकार से लागू किये जाने की मांग की है।

रिपोर्ट – अनुज मौर्य /सुशील शुक्ला

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