भाजपा ने शिक्षा मित्रों को धोखा दिया : अजय राय

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चन्दौली (ब्यूरो) सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द करने के बाद शिक्षा मित्र पूरे प्रदेश में मोदी-योगी सरकार द्वारा धोखा देने व वादाखिलाफी के विरूद्ध आंदोलित हैं। गौरतलब है कि शिक्षा मित्र 15 वर्षों से भी ज्यादा अरसे से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। शिक्षा मित्र अपनी नौकरी पक्की करने की मांग को लेकर लंबे अरसे से आंदोलित रहे हैं और उनकी मांग पूरी तौर पर जायज भी है। पिछली सरकार द्वारा समायोजन में अपनायी गई प्रक्रिया में तकनीकी खामियां व हाई कोर्ट में मजबूत पैरवी न कर पाना अपनी जगह हैं। इन स्थितियों को अच्छी तरह जानते हुए ही भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में शिक्षा मित्रों का हर संभव सहयोग करने का वादा किया था, परन्तु सत्ता में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने शिक्षा मित्रों के पक्ष में मजबूती से पक्ष रखने के बजाय समायोजन को रद्द करने के तर्क को ही सही मान लिया और अपना पल्ला यह कह कर झाड़ लिया कि सारा दोष पिछली सरकार का है।

उक्त बातें स्वराज अभियान के नेता अजय राय ने कहीं उन्होंने कहा कि यही नहीं अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षा मित्रों पर लाठी चार्ज व बर्बर दमन किया जा रहा है और सरकार व भाजपाई उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने के प्रयासों में लगे है। अब सरकार प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह तर्क दिया जा रहा है कि ज्यादा योग्य अभ्यर्थियों के रहते कम योग्य शिक्षा मित्रों का समायोजन बिना किसी प्रतियोगिता के करना योग्य अभ्यार्थियों के साथ अन्याय है, इसके पक्ष व विपक्ष में ढेरों तर्क दिये जा सकते है यहां इस बहस का कोई विशेष औचित्य नहीं है। सिर्फ शिक्षा मित्रों का ही मामला कोर्ट में नहीं गया बल्कि तकरीबन हर भर्ती न्यायालय से होकर जाने के बाद ही पूर्ण होती है और कई बार तो दसियों साल तक नौकरी करने के बाद तक मामला न्यायालय में लंबित रहता है। आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

दरअसल आज रोजगार मे भारी संकट है जिसके चलते गलाकाट प्रतियोगिता है, सरकार द्वारा इस संकट को हल करने ‘यानि ऐसी नीतियां बनाने जिनसे रोजगार का सृजन हो’ के बजाय बेरोजगार समूहों को आपस में विभाजित कर रोजगार के भयावह होते जा रहे संकट से ध्यान हटाने व युवाओं को दिग्भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। आप खुद देखें चुनाव में यह वादा किया गया था कि 90 दिन के भीतर समस्त खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। परन्तु योगी सरकार के एजेंडे में नई भर्तियां शुरू करना तो है ही नहीं बल्कि अभी तक पुरानी परीक्षाओं के होने पर भी संशय बना हुआ है। सरकार चयन के सभी महत्वपूर्ण पदों पर अपने लोगों को बैठाना चाहती है, इसी विवाद से अभी तक आयोग व चयन बोर्ड के कामकाज में लगातार अवरोध बना हुआ है और सरकार द्वारा स्वायत्त संस्थाओं में किये जा रहे अनावश्यक हस्तक्षेप से युवाओं के हितों को कुर्बान किया जा रहा है। 3 वर्ष पहले मोदी सरकार ने भी हर साल 2 करोड़़ रोजगार देने की असलियत को भी देखा जा चुका है। इसलिए आज मौजूदा संकट के समाधान के लिए जरूरी है कि काम के अधिकार को नीति निदेशक तत्वों से मौलिक अधिकार में लाया जाये और मोदी-योगी सरकार ने जो वादे किये थे उन्हें पूरा करे। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन की जरूरत है और इस दिशा में प्रयास भी किये जा रहे हैं, स्वराज अभियान शिक्षा मित्रों की लडाई का समथर्न व आंदोलन के साथ है |

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