बीजेपी को झटका,पूर्व बाहुबली विधायक चंद्रभद्र सिंह भाई समेत बसपा से जुड़े

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बल्दीराय/सुल्तानपुर : वरुण गांधी के संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर से बीजेपी के लिए बुरी खबर है। पांच सालों तक भगवाधारी रहे बाहुबलि पूर्व विधायक चन्द्रभद्र सिंह सोनू व उनके अनुज जिला पंचायत सदस्य यशभद्र सिंह मोनू नें हाथी की सवारी शुरू कर दिया है।आगामी दो दिसम्बर को उनके पैतृक गांव मायंग में बीएसपी का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित है, जिसमें बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा मुख्य अतिथि होगें।दो दिसम्बर को मायंग में होगा बीएसपी का विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन, लाखों वर्कर्स जमा होगें |

गौरतलब हो कि पांच साल पूर्व 2013 में जब पूर्व चन्द्रभद्र सिंह सोनू नें बीजेपी का दामन थामा था उस समय राजनैतिक गलियारों में तूफान आ गया था। तरह-तरह की प्रतिक्रियाए सामनें आई थी, अब जब इस बाहुबलि नेता नें बीएसपी में क़दम रखखा है तो अन्य दलो में खलबली मच गई है।आपको बता दें कि आगामी दो दिसम्बर को इस बाहुबलि नेता के पैतृक गांव मायंग में बीएसपी का एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन होना तय पाया है, इसमें लाखों कार्यकर्ताओं के जमा होने की चर्चा है। बताया जा रहा है के इसी दिन कुछ और बड़े नेता भी बीएसपी में शामिल हो सकते हैं। खैर जिस तरह से बीएसपी की होर्डिंग्स से शहर और आसपास के इलाका गुलजार हुआ है उससे ये लगने लगा है के आनें वाले 2019 में सुल्तानपुर से बीजेपी की राह आसान नहीं होगी।

कुछ ऐसा है बाहुबलि बंधुओ का राजनैतिक सफर सनद रहे के अपने राजनैतिक कैरियर की शुरुआत में चन्द्रभद्र सिंह सोनू नें 2007 में सपा के सिम्बल पर इसौली विधानसभा सीट से जीत दर्ज कराई थी। 2009 में सपा से इस्तीफा देकर उन्होंने जून 2009 में बीएसपी ज्वाइन किया और इसी साल हुए बाई इलेक्शन में उन्होंने इसौली से रिकार्ड मतों से जीत हासिल किया। 2012 के विधानसभा के आम चुनाव में वो बीएसपी को अलविदा कह चुके थे और इस चुनाव को उन्होंने पीस पार्टी के बैनर तले सुल्तानपुर विधानसभा सीट से लड़ा, जबकि उनके अनुज बाहुबलि यशभद्र सिंह मोनू इसौली सीट से मैदान में आए, चन्द्रभद्र सिंह सोनू ने 2013 में बीजेपी ज्वाइन किया था, ये अलग बात है दोनों को पराजय हाथ लगी, अंत में चन्द्रभद्र सिंह सोनू नें 2013 में बीजेपी ज्वाइन कर लिया और 2014 के लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी की रिकार्डेड जीत में उनका अहम रोल रहा। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव आया, जिसमें उनके निर्दल उम्मीदवार के रूप में उनके अनुज मैदान में उतरे। उनके मैदान में उतरने के बाद बीजेपी वाक ओवर कर गई लेकिन अंत में यशभद्र सिंह राजनैतिक कूटनीति का शिकार हो गए। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव आया तो इसौली सीट से यशभद्र सिंह ने लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा ये अलग बात है यहां भी वो साजिश का शिकार हुए लेकिन उन्होंने बीजेपी को चारो खानें चित कर दिया था।

रिपोर्ट – निसार अहमद

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