बीजेपी पूरी ताकत लगा रही स्वामी प्रसाद मौर्य को मानने में।

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कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्या की नाराजगी के बाद बीजेपी का दिग्गजी नेताओ के नेतृत्व यूं ही उनको मनाने में नहीं लगा है। मौर्या उस वर्ग की अगुवाई करते हैं जिसकी नाराजगी बीजेपी के 60 से 70 सीटों को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती हैं। रविवार को अचानक बीजेपी से स्वामी प्रसाद मौर्या की नाराजगी की खबर आई। उनकी नाराजगी के बाद भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनने का सपना अधूरा दिखने लगा और सारा टाइम टेबल ही बिगड़ गया। देर रात तक भाजपा का संसदीय बोर्ड बैठक के बाद भी अपने प्रत्याशियों की सूची जारी न कर सका। लिस्ट तैयार होने के बावजूद उसे पुनः संशोधन का फैसला लिया गया।

फिर क्या स्वामी को मनाने भाजपा के दिग्गाजी नेताओ की उपास्थि में शामिल राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, यूपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य स्वामी प्रसाद मौर्य को मनाने उनके घर पहुंच गए। लंबे समय की बातचीत के बाद मौर्य की नाराजगी कुछ कम हुई। फिर जाकर देर शाम को सूची जारी करने की कवायद शुरू हुई।

एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी को एक नेता को मनाने की नौबत यूं ही नहीं आई। स्वामी प्रसाद मौर्य होने का मतलब बीजेपी अच्छी तरह जानती है। बीजेपी इस समय पिछड़ा कार्ड खेल रही। इस कार्ड में उसका एक प्रमुख वोटर दलित, पिछड़ो एवं शाक्य सैनी कुशवाहा, कोइरी मेहता मंडल , सहित मौर्य समाज भी है। राजनैतिक विशेषज्ञों के अनुसार पूरे प्रदेश में करीब 60 प्रतिशत इस समाज की हिस्सेदारी है। यह समाज कम से कम 60 से 70 सीटों को प्रभावित करने की ताकत रखते है। अकेले फ़ैजाबाद ,लखनऊ,गोरखपुर-बस्ती,वनारस मंडल सहित कई मंडलो की दर्जनो सीटों पर इस समाज का दबदबा है।

क्योकि स्वामी प्रसाद मौर्य इस समाज के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और आज की तारीख में उनकी अपने समाज पर बेहतर पकड़ भी है। यही नहीं बसपा में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने पिछड़ो और दलितों सहित अल्पसंख्यक में अच्छी खासी पैठ बनाई है। विशेषज्ञय मानते हैं कि अगर स्वामी प्रसाद मौर्य नाराज हो जाएंगे तो कई सीटों पर नुकसान हो सकता है।

रिपोर्ट – एस. बी. मौर्या

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