छत्तीसगढ़ में कांग्रेस प्रवक्ता ने लगाया चखना घोटाले का आरोप

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रायपुर (ब्यूरो) छत्तीसगढ़ में कई तरह के घोटाले की बात आपने सुनी होगी, अब एक नया घोटाला सामने आया है। कांग्रेस ने प्रदेश में चखना घोटाले का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने प्रेसवार्ता कर ये आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि खाद्य सामग्री बिक्री ठेले का लाइसेंस/अनुमति प्रदान करने का कार्य खाद्य एवं औषधि विभाग, खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम की धाराओं के तहत जारी करता है। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के अनुसार 12 लाख से कम बिक्री करने वाले को परमिशन एवं 12 लाख रू. से अधिक बिक्री करने वाले को नियमानुसार लाइसेंस प्रदान किया जाता है, जो आबकारी विभाग के अधिकार क्षेत्र के नहीं है। सहायक आयुक्त आबकारी बिलासपुर द्वारा कलेक्टर बिलासपुर के हवाले देशी/विदेशी मदिरा दुकानों में संचालित आहता के 50 मीटर बाहर खाद्य सामग्री के ठेले लगाने हेतु अनुज्ञप्ति प्रदान की है। जिसकी जानकारी खाद्य एवं औषधि विभाग को नहीं दी गई।

बिलासपुर जिले में 71 शराब दुकानों में 142 ठेलों की अनुमति प्रदान की गई है, जिसके एवज में ठेला मालिको को रोजाना 1500/- रू. के हिसाब से 45,000/- रू. महिने देना पड़ता है, हर महिने 63 लाख 90 हजार की वसूली की जाती है। इसे लेकर छ.ग. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकास तिवारी ने राज्य सरकार ये सवाल किया है कि आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के गृह जिले में हर महीने उन्हीं के विभाग के 63 लाख 90 हजार की उगाही हो रही है, तो पैसो का बंदरबाट कौन-कौन कर रहा है?

आबकारी विभाग केवल देशी एवं विदेशी शराब बिक्री का लाइसेंस, अनुज्ञप्ति जारी कर सकता है, तो नियम विरूद्ध खाद्य सामग्री बिक्री हेतु लाइसेंस कैसे जारी किया गया? बिलासपुर के जारी 142 ठेलों से वसूले जा रहे 63 लाख 90 हजार रूपयों को आबकारी विभाग किस बैंक खातों के जमा कर रहा है? आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल इतने बड़े घोटाले में चुप्पी क्यों साध रखी है, क्या उनकी मौन सहमति है इस भ्रष्टाचार में?

दिनांक 23.06.2017 को उपायुक्त आबकारी संभागीय उड़नदस्ता बिलासपुर संभाग द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है। जिसमें ठेलों से वसूले गये 63 लाख 90 रू. के प्रतिमाह की राशि का उल्लेख क्यों नहीं किया गया है? इतने के घोटालों की जांच संभागीय उड़नदस्ता से करवाना ही संदेहास्पद है? प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) (D) एवं 13(2) एवं आईपीसी की धारा 409 एवं 420 के तहत दर्ज करवायी जायेगी एवं लोक-आयोग में शिकायत पंजीबद्ध करवायी जायेगी।

रिपोर्ट – हरदीप छाबड़ा

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