हाजिरी लगा कर रफूचक्कर हुये ब्लॉक कर्मचारी

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कोंच (जालौन ब्यूरो) : सरकारी कार्यालयों में कामकाज की स्थिति की जो तस्वीर शनिवार को ब्लॉक कार्यालय में एसडीएम को निरीक्षण के दौरान देखने को मिली उसे देख कर वे खुद ही चकरा गये। अधिकांश कर्मचारी बॉयोमेट्रिक विधि से हाजिरी लगा कर रफूचक्कर हो चुके थे और जो उपस्थित थे भी वे चाय या पान की गुमटियों पर गप्प सड़ाका करने में मशगूल थे। तीन लोग जो हाजिरी भर कर फूट लिये थे उन्हें बुला कर सुधर जाने की कड़ी चेतावनी दी गई। सबसे दिलचस्प स्थिति तो तहसील दिवस की शिकायतों को लेकर दिखी, 7 दिसंबर 2016 के बाद से तो तहसील दिवस की एक भी शिकायत नहीं दर्ज की गई जिस पर एसडीएम ने कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। हैरान करने बाली बात तो यह है कि जिन शिकायतों का निस्तारण एक सप्ताह में करने के कड़े निर्देश हैं वे शिकायतें सात महीने से लंबित पड़ी हैं। कुल मिला कर ऐसा लगा जैसे ब्लॉक कार्यालय का उपयोग केवल मटरगश्ती केन्द्र के रूप में हो रहा हो।

एसडीएम मोईन उल इस्लाम ने शनिवार को प्रात: 10.32 बजे खंड विकास कार्यालय का औचक निरीक्षण किया तो वहां अव्यवस्थाओं के अंबार लगे दिखे। कर्मचारियों की स्थिति यह थी कि बॉयोमेट्रिक सिस्टम से हाजिरी पूरी करने के बाद अधिकांश कर्मचारी या तो समर वैकेशन पर निकल गये से लगे या फिर चाय पान की गुमटियों पर गप्पें मारने चले गये थे। जब इस बाबत पूछा गया तो बताया कि कोई चाय पीने गया है तो कोई इधर उधर है। सभी को बुलाने के बाद भी तीन लोग ऐसे रहे जो वहां मौजूद नहीं थे लेकिन उनकी हाजिरी पूरी थी। एसडीएम ने इन तीनों एडीओ वीरेन्द्रकुमार निरंजन, चालक सुरेशचंद्र व पत्र वाहक पंचमसिंह को फोन करके बुलाया और कार्यशैली सुधारने की कड़ी चेतावनी दी। सबसे ज्यादा खराब स्थिति तो शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बाले तहसील दिवसों में आने बाली शिकायतों की दिखी। कार्यालय की अभिलेखीय स्थिति बताती है कि इन शिकायतों को कहीं दर्ज करने की ही व्यवस्था नहीं है, जो रजिस्टर बना है उसमें 7 दिसंबर 2016 के बाद की एक भी शिकायत दर्ज नहीं है और जब दर्ज ही नहीं है तो निस्तारण का सवाल कहां से उठेगा। गौरतलब है कि 20.11.16 की कुल 6 शिकायतें दर्ज मिलीं जिसमें एक का निस्तारण बताया गया है और शेष पांच का पांच महीने में भी निस्तारण नहीं हो सका है।

जनसुविधा केन्द्र उरई से आने बाली शिकायतों की अगर बात करें तो पंजिका में 2016-17 का ही विवरण मिलता है जिसमें 13 शिकायतें दर्ज दर्शाई गई हैं और 9 का निस्तारण बताया गया है जबकि छिद्दनदेवी गुमावली (1.6.16), रामकुमारी गुमावली (27.7.16), विमलादेवी पचीपुरा (27.8.16) तथा मानवेन्द्र पिरौना (22.9.16) के निस्तारण के बाबत कुछ भी दर्ज नहीं मिला। शिकायत पंजिका में अगस्त 2016 के बाद से एक भी शिकायत दर्ज नहीं है। जनता दर्शन रजिस्टर में भी 16 अगस्त 2016 तक की ही प्रबिष्टिïयां मिलीं जिसमें 11 शिकायतें आई, निस्तारण किसी का भी नहीं हुआ। पटल का काम देख रहे बाबू संजय शर्मा के मुताबिक सभी लंबित शिकायतें सचिव स्तर पर लंबित हैं और सात माह में भी इनके निस्तारण की फुर्सत उन्हें नहीं मिली। एक और आश्चर्यजनक स्थिति मस्टर रोल को लेकर देखने को मिली, ब्लॉक की 62 ग्राम पंचायतों में केवल 32 के ही मस्टर रोल जमा बताये गये, इसका सीधा मतलब यह है कि शेष 30 में पिछले दो महीने में मनरेगा का कोई कार्य ही नहीं कराया गया। एसडीएम ने बताया है कि यह स्थिति देख कर वह खुद भौंचक हैं कि किस तरह की धुंधमारी फैला रखी है। उन्होंने पूरी रिपोर्ट डीएम को भी भेजी है।

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव

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