नीरज हत्याकांड के तीन माह बाद फिर धनबाद में खेला गया खूनी खेल

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धनबाद(ब्यूरो)- कोयलांचल की धरती एक बार फिर हुई लहूलुहान बैंक मोड़ थाना से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर फायरिंग होती रही और आस पास एक भी पुलिसकर्मी नजर नहीं आए। बैंक रोड में रविवार की देर रात वासेपुर के जमीन कारोबारी पप्पू खान उर्फ पप्पू पाचक को गोली मार दी गई।इस घटना से वासेपुर में एक और गैंगवार ने दस्तक दे दी है। आरा मोड रहमतगंज निवासी सलाउद्दीन खान का बेटा पप्पू पाचक अपनी स्विफ्ट कार जेएच 10 एटी-4172 से बैंक रोड ईद की खरीदारी करने गए थे। पप्पू का बेटा, भांजा समेत अन्य लोग शिवम कांप्लेक्स में जूता खरीद रहे थे। इसी दौरान पप्पू के मोबाइल पर किसी का फोन आया और पप्पू बात करते हुए दुकान से निकल अपनी स्विफ्ट में बैठने के लिए बढ़े कि उन पर फायरिंग शुरू कर दी गई। हमलावरों ने पप्पू पर ताबड़तोड़ 10 से 12 गोलियां बरसाई जिसमें दो गोली पप्पू के सीने में लगी और वह जमीन पर गिर गया।

बताया जाता है कि 2 लोग बाइक पर सवार थे जिन्होंने पप्पू पर फायरिंग करने के बाद टेलीफोन एक्सचेंज रोड की तरफ से भाग गए। लहूलुहान पप्पू को घायल अवस्था में लेकर उसके भाई और समर्थक सेंट्रल अस्पताल ले गए सेंट्रल अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद उसे दुर्गापुर मिशन अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। अस्पताल पहुंचे समर्थक चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे कि अब वासेपुर का नया इतिहास लिखा जाएगा।समर्थक बोले- भाईजान को गोली मारकर अच्छा नहीं किया, इसका अंजाम अब भुगतना पड़ेगा। अस्पताल में भारी संख्या में मौजूद समर्थक बार-बार आक्रोशित हो जा रहे थे। सेंट्रल अस्पताल से दुर्गापुर रेफर होने के बाद एंबुलेंस आने में देरी होने पर समर्थक भड़क गए। समर्थकों ने वहां मौजूद चार-पांच एंबुलेंस के शीशे तोड़ डाले। कभी मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर तो कभी सेंट्रल अस्पताल प्रबंधन को गुस्सा दिखा रहे थे। सेंट्रल अस्पताल द्वारा हाथ खड़े करने के बाद कुछ समर्थक उसे जालान में भर्ती कराना चाह रहे थे। घटना की सूचना पाकर सिटी एसपी पीयूष पांडेय, डीएसपी नवल शर्मा, डीएसपी मुकेश महतो, धनबाद थाना थानेदार अखिलेश्वर चौबे समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और छानबीन की। पुलिस ने 10 खोखे बरामद किए।

रात करीब दो बजे एसएसपी मनोज रतन चौथे भी दल बल के साथ घटनास्थल पहुंचे। सरायढेला थानेदार निरंजन तिवारी सेंट्रल अस्पताल में पुलिस के साथ मौजूद थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फहीम गुट से समय-समय पर टकराने वाले पप्पू खान को गोली मारने की घटना का परिणाम आने वाले समय पर दिखेगा। मालूम हो कि 2008 में पप्पू खान के भाई ग्यास खान की लाश सिंघाड़ा तालाब में मिली थी। हत्या का आरोप वासेपुर के गैंगेस्टर फहीम खान पर लगा था। चांदरात को वासेपुर के पप्पू खान को गोली लगने से इलाके का माहौल भी दहशत भरा है।

घटना के पीछे कौन मामा या भांजा-
वासेपुर में दो दशक के गैंगवार में दर्जनभर से ज्यादा लोगों की हत्या हुई है इनमें दो महिलाएं भी शामिल है वासेपुर रंगदारी, लोहा कारोबार सरकारी जमीन पर कब्जा के लिए वर्चस्व जमाने के लिए बदनाम है ।

गैंग्स पर फहीम खान का कब्जा कुख्यात फहीम खान लगभग 9 साल से जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है। वर्तमान में उसे अपने भांजे से ही चुनौती मिल रही है। भांजे पूरी तरह से अलग होकर मामा का विरोध कर रहे हैं वासेपुर में सरकारी जमीन की लूट मची है आदिवासी जमीन, सरकारी जमीन ,रेलवे की जमीन को कब्जा कर बेचा जा रहा है जमीन कारोबार में मामा भांजे में अदावत है ।दोनों गुट को अलग-अलग रंगदारी चाहिए दोनों गुट में कारोबारी जुड़े हुए हैं दोनों गुट एक दूसरे के खिलाफ केस भी करवाने लगे हैं ।पुलिस में लगातार शिकायत मिल रही है अभी फहीम के सभी भांजे जेल से बाहर है फहीम भाग फिलहाल जमशेदपुर जेल में है। पुलिस उलझन में है कि पप्पू पर गोली में चलाने में किसका हाथ है।

क्या कहा परिजनों ने-
परिजनों ने पुलिस के समक्ष कहा है कि वासेपुर में जो खून की होली खेलता है उसे पकड़े अगर पप्पू नहीं रहेगा तो वासेपुर अशांत हो जाएगा ।पुलिस इस बात को लेकर उलझन में है कि पप्पू पर गोली भांजा गुट ने चलाई है या फहीम गुट ने। वासेपुर में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है अतिरिक्त बल को तैनात कर दिया गया।हमले में वासेपुर गैंग का हाथ माना जा रहा है ।जमीन कारोबार में फहीम खान और उसके भांजे का अलग-अलग गुट काम करता है इस घटना के पीछे फहीम के लोगों का हाथ है कि उसके भाइयों का पुलिस तहकीकात कर रही है।

जमीन कारोबार के कारण था गैंग्स के निशाने पर-
पप्पू अपने भाइयों के साथ मिलकर जमीन कारोबार कर रहा था ।जमीन कारोबार में पप्पू ब्रदर्स को बेहतर आय हो रही थी । अभी गैंग से जुड़े लोगों के निशाने पर था जमीन कारोबार में वासेपुर के ही कुछ लोगों से विवाद हुआ था बाद में या विवाद सलट गया था ।हालांकि पप्पू ने पूरी तरह वासेपुर गैंग वार से दूरी बना ली थी ।वह अपने कारोबार में भाइयों के साथ लगा हुआ था पप्पू इस बात से निश्चित था कि अब वह किसी का दुश्मन नहीं रहा लेकिन ईद से एक दिन पहले वह विरोधी की गोली का निशाना बन गया।

एसएसपी मनोज रतन चोथे ने क्या कहा-
प्रारंभिक जांच में पुरानी प्रतिद्वंदिता के कारण गोली मारने की घटना हुई है ।पता लगाया जा रहा है कि वासेपुर के किस गैंग का हाथ है ।पुलिस घटना के अन्य कारणों पर भी जांच कर रही है शीघ्र ही मामले का खुलासा हो जाएगा परिजनों से भी पूछताछ की जाएगी।

अदावत का खूनी इतिहास-
फिल्मों के जरिए देश-दुनिया में चर्चा में आए वासेपुर में गैंगवार की कहानी अगर रील से हटकर रीयल लाइफ में देखी जाए तो यहां अदावत का खूनी इतिहास नजर आएगा। दर्जनभर से ज्यादा सांसें थम चुकी हैं ।मगर न तो बंदूक का बारूद खत्म हुआ है और न ही चाकू की धार भोथर हुई है। रविवार की रात पप्पू खान को गोली मारने को पुलिस गैंगवार से जोड़कर तफ्तीश कर रही है।

कत्ल-दर-कत्ल का सिलसिला
1983: शफी खान, बरवाअड्डा
1984: असगर, नया बाजार
1985: अंजार, भूली मोड़
1986: शमीम खान, धनबाद कोर्ट
1989: छोटे खान, रांगाटांड़
1998: सुल्तान, नया बाजार
1998: नजीर, हिल कॉलोनी मजार
2003: जफर अली, वासेपुर
2003: नजमा, शमां, डायमंड क्रासिंग
2010: वाहिद आलम, रांची
2011: इरफान खान, डीआरएम ऑफिस
2012: सोनू आलम, नया बाजार
2012: आमीर जान, आरा मोड़
2014: टुन्ना खान, पुराना बाजार

फहीम से अदावत
गोली लगने से घायल पप्पू खान कुछ साल पहले वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान का खास था। फहीम गुट पर हुए कई मामलों में नामजद रहा है। हाल के दिनों में पप्पू और उसके भाई मिस्टर की फहीम के बेटों से दूरियां बढ़ गई थीं। फहीम से अलग हुए उसके भतीजे गोपी खान, प्रिंस खान, गोडविन और बंटी गुट से भी पप्पू की नहीं पट रही थी। पप्पू जमीन का कारोबार कर रहा था। माना जा रहा है कि जमीन विवाद में घटना घटी है।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ वासेपुर
पप्पू पर गोली चलने की खबर के बाद वासेपुर में पुलिस की चौकसी बढ़ गई। हथियारबंद जवानों की तैनाती वासेपुर और आरा मोड़ में कर दी गई है। रविवार की रात और सोमवार को कई जगहों पर छापेमारी भी की गई।

रिपोर्ट- गणेश कुमार 

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