बोर्ड से उतरा डिजिटल का भूत, नहीं होगा डिजिटली मूल्यांकन

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पटना- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का दो महीने में ही डिजिटल का भूत उतर गया है। वार्षिक माध्यमिक (मैट्रिक) व (उच्च माध्यमिक) की परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन डिजिटली नहीं होगा।

बोर्ड ने कॉपियों का मूल्यांकन पूर्व की तरह ही कराने का फैसला लिया है। इस संबंध में पत्र सभी जिलाधिकारियों को भेज दिया गया है। हालांकि कॉपियों की बार कोडिंग होगी। इस बार कंपार्टमेंटल में बोर्ड द्वारा कॉपियों का मूल्यांकन डिजिटली तौर पर कराया गया था। इसमें काफी दिक्कतें हुई थी। खासकर शिक्षकों को कॉपियों के मूल्यांकन में काफी परेशानी हुई थी। एकाएक कंप्यूटर थमाने का विरोध भी शिक्षकों ने किया था। इसका रिजल्ट 23 दिसंबर को निकाला गया। पर मार्कशीट अभी छात्रों को नहीं मिली है। इन्हीं सब कारणों से बोर्ड को अपना फैसला बदलना पड़ा है।

कंपार्टमेंटल में देरी से बोर्ड की खुली आंखें –
जिस तरह से टीसीएस कंपनी व नेयाशा ने कंपार्टमेंटल की परीक्षा में विलंब किया है। इसकी स्थिति को देखते हुए बोर्ड को पहले ही समझ में आ गया था कि वार्षिक परीक्षा में दिक्कत हो सकती है। बोर्ड के पदाधिकारियों ने बैठक कर डिजिटली कॉपियों का मूल्यांकन नहीं करने का फैसला किया। इस प्रक्रिया से मूल्यांकन करने में बोर्ड के लाखों रुपए अतिरिक्त खर्च भी आ रहा था। इस बार ही ऑनलाइन मूल्यांकन में कई तरह की परेशानी हुई है।

कॉपियों की स्कैनिंग में होती दिक्कत –
सबसे बड़ी बात की कंपार्टमेंटल की परीक्षा में इंटर व मैट्रिक मिलाकर सिर्फ डेढ़ लाख परीक्षा में शामिल हुए थे। इसके हिसाब से कम ही की स्कैनिंग करानी पड़ी थी। वार्षिक परीक्षा में मैट्रिक व इंटर मिलाकर 30 लाख छात्रों की संख्या है। इसके हिसाब से देखा जाए तो कम से कम एक करोड़ 75 लाख कॉपियों की स्कैनिंग करानी पड़ती। इतनी कॉपियों की स्कैनिंग कराने और बार कोडिंग करने में ही अच्छा खासा समय लगता। इसके लिए हजारों कंप्यूटर की व्यवस्था करनी पड़ती। इतने तकनीकी दक्ष शिक्षकों की संख्या भी नहीं थी।
रिपोर्ट- आसुतोष कुमार
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