सुप्रीम कोर्ट ने कहा महिला का शरीर एक मंदिर हैं

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भारत की सर्वोच्च न्यायलय ने आज शादी का झांसा या फिर किसी भी प्रकार से रेप करने वाले मामलों में किसी भी प्रकार की मध्यस्थता और समझौता करवाने पर आपत्ति जताई है। आज एक फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, ”महिला का शरीर मंदिर जैसा है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि रेप के मामलों में किसी भी प्रकार की कोई मध्यस्थता या फिर समझौता नहीं हो सकता।”

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज यहाँ यह फैसला मध्य प्रदेश की एक निचली अदालत के द्वारा रेप के आरोपी को बरी कर दिए जाने के खिलाफ राज्‍य सरकार की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया हैं ।

rape victim

आपको बता दें कि जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आज कहा हैं कि किसी भी महिला या फिर लड़की से रेप हुए रेप के मामले में पीड़ित महिला और आरोपी के बीच किसी भी प्रकार का समझौता करवाना महिलाओं के सम्मान के खिलाफ हैं I हम आपको बता दें कि देश की सर्वोच्च न्यायालय ने कहा हैं कि इस प्रकार के समझौते में जो लोग भी मध्यस्थता करने के लिए आगे आते हैं उनके अन्दर संवेदनशीलता की कमी है। जस्टिस दीपक मिश्रा की खण्डपीठ ने आगे कहा हैं कि इस तरह के किसी भी मामले अदालत नरम रुख नहीं अपनाएगी।

आपको ज्ञात हो कि अभी जल्द ही मद्रास हाईकोर्ट के जज ने नाबालिग से रेप के दोषी को समझौते के लिए बेल दे दी थी

आपको बता दें कि अभी बीती कुछ दिन पहले ही 2008 में हुए एक बलात्कार के मामले में 7 साल की सजा पाए हुए एक कैदी को मध्यस्थता के जरिये पीड़ित महिला से समझौता करने के लिए जमानत पर रिहा कर दिया था I इस मामले में आपको बताते चलते हैं कि जस्टिस डी. देवदास ने कहा था, ”वह पीड़िता के नाम पर 1 लाख रुपए की एफडी भी करवाए।”

ज्ञात हो कि इस मामले में पीडिता के माता पिता नहीं हैं वह पहले ही स्वर्गवासी हो चुके हैं लेकिन जब महिला के साथ यह रेप हुआ था उस समय उसकी उम्र मात्र 14 वर्ष की थी और उस समय उसके माता-पिता भी जीवित थे, और गाँव में उनके ऊपर बेटी का अबोर्शन करवाने के लिए काफी दवाव भी बनाया गया था और ऐसा न करने पर उनके साथ मारपीट भी की गयी थी I

इस पूरे मामले में पीड़ित महिला ने किसी भी प्रकार के समझौते से कर दिया था इनकार

आपको बता दें कि यह पूरा मामला तमिलनाडु राज्य के कुड्डालोर से 80 किलोमीटर दूर एक गाँव की हैं जहाँ पर आज भी यह बिनब्याही माँ अपनी अकेली बेटी के साथ रह रही हैं, सूत्रों के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब जज ने यह फैसला सुनाया तो इस माँ ने कहा कि क्या आरोपी को जमानत देते वक्त जज साहब ने एक भी बार यह सोचा कि पिछले इतने सालों (2008 से 2015) तक मैं कैसे रही हूँ और मैंने किन-किन हालातों का सामना किया हैं, इस पीड़ित और दुखी माँ ने कहा आज मेरी बेटी छह साल की हो गयी हैं आज जब वह मुझसे पूछती हैं कि मेरे पापा कहा हैं तो मैं उससे कह देती हूँ कि वह नहीं हैं लेकिन जब वह बड़ी हो जाएगी तो मैं उससे बताउंगी की कि उसका बाप एक रेपिस्ट था I पीड़ित लड़की ने इस पूरे आदेश के बारे में कहा कि जज साहब को इसे रद्द कर देना चाहिए I

 

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