कभी भारत के लिए गोल्ड लाने वाला मुक्केबाज आज अपने इलाज़ के लिए मांग रहा मदद…

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खेल: कभी भारतीय बॉक्सिंग में चैंपियन रहे और 1980 में नई दिल्ली में आयोजित बॉक्सिंग मैच में विश्व के मशहूर मुक्केबाज़ मुहम्मद अली को टक्कर देने वाले 69 वर्षीय कौर सिंह को आज अपनी बीमारी के लिए एक प्राइवेट फिनान्सर से लिए लोन को चुकाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है|

दरअसल, लगभग एक साल पहले कौर सिंह को दिल का ऑपरेशन कराना पड़ा था, जिसके लिए उन्हें पांच लाख रुपए की आवश्यकता थी। भूतपूर्व सैनिक होने के कारण सेना से उन्हें तीन लाख रुपए की मदद मिल गई लेकिन बचे हुए दो लाख चुकाने के लिए उन्हें पैसे उधार लेने पड़े। वह इस समय मोहाली के एक प्राइवेट अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं और उन्होंने इलाज के मदद की गुहार लगाई है|

बता दें जब 1982 में कौर सिंह ने एशियाड खेलों में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था, तब पंजाब सरकार ने उन्हें 1 लाख रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की थी। हालांकि आज तक उन्हें यह रकम नहीं मिल पाई है। सरकारें बदल गईं और फिर कौर सिंह की आवाज नौकरशाही के चक्करों में ही कहीं फंस कर दब गई। कौर सिंह कहते हैं कि मुझसे 1 लाख देने का वादा किया गया था, जिसकी कीमत आज करीब 20 लाख रुपये होती।’

हालाँकि इस मामले में उनकी मदद के लिए सरकार के खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने हाथ बढ़ाया है| राठौर ने ट्वीट करते हुए कहा कि उन्हें पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी कौर सिंह की बीमारी के बारे में पता चला, सर आपने हमेशा देश का सिर ऊंचा रखा है, आज इंडिया आपका सिर नहीं झुकने देगा| हम नेशनल वेलफेयर फंड से 5 लाख रुपए मदद के लिए देंगे|

राठौर की इस पहल के बावजूद हमें यह बात सोचनी चाहिए कि क्या जो युवा अपनी पूरी जवानी देश के लिए तमगे लाने में खपा देता है, उसकी ऐसी हालत होनी चाहिए? अब इसके लिए जिम्मेदार सरकार है या प्रशासन इस पर फ़िलहाल चर्चा बेकार है| जिम्मेदार जो भी है किन्तु हमें इस बात पर विचार जरूर करना चाहिए कि देश के इन नौजवानों का क्या भविष्य होना चाहिए ?

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