होली मनाने ननिहाल गए लड़के की नदी में डूबकर मौत

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बलिया (ब्यूरो)- नियति किस प्रकार पल भर में रंग बदल देती है इस का पूर्वाभास किसी को होना असंभव है। यही कारण है कि कभी-कभी उल्लास का वातावरण पल भर में रुदन बन जाता है। क्रूर नियति का एक हल्का आघात जीवन को मार्मिक का और हृदय विदारक बन जाता है। इसका उदाहरण सोमवार को उस समय क्षेत्र के बीहरा गांव में देखने को मिला जब होली मनाने ननिहाल आए आकाश पांडेय की घाघरा नदी में डूबने से मौत हो गई।

उसकी मौत ने पूरे गांव की होली का उल्लास मातम में बदल दिया। गांव वालों के लिए यह मातम तो चंद दिनों के लिए है जबकि उसके परिवार के होली का उल्लास आजीवन शोक में बदल गया ।अब तो कोई शुभ घड़ी आने तक उसके परिवार में कभी होली का रंग नहीं चलेगी ।अबीर गुलाब नहीं उड़ेगा न हीं होली के अवसर पर परिवार वालों के चेहरे पर कोई खुशी रहेगी ।उसके किस दुर्भाग्य ने परिवार वालों को आजीवन यह दर्द दे दिया यह समझ से परे है।

सोमवार को दोपहर में आकाश के नदी में डूबने की खबर मिलते ही आशंका ग्रस्त व भयभीत गांव वालों के पैर नदी के तरफ बढ़ लिए। कुछ देर में ही तट पर काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। नदी से लाश निकालने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि शायद उसमें जीवन के अवशेष बचे हैं इसी उम्मीद में उसे अस्पताल पहुंचाया गया वहां मृत घोषित किए जाने से पूर्व तक का समय इस उम्मीद और दुआ में गुजरा कि शायद डॉक्टर आकाश को बचा ले। लेकिन होता तो वही है जो मंजूरे खुदा होता है। जो भगवान के पास चला जाता है वह अपना हर लौटकर नहीं आता डॉक्टर द्वारा आकाश को मृत घोषित किए जाते ही मौके पर इकट्ठा लोगों की आंखें नम हो गए।

लोगों की होली की सारी तैयारी धरी की धरी रह गई। गांव वाले जहां एक दिन पूर्व कहां होली दहन के लिए इकट्ठा हुए थे आज नदी तट पर आकाश की चीता जलाने के लिए इकट्ठा होना पड़ेगा ।उधर आकाश की मौत पर घर के दरवाजे पर परिवार की महिलाएं करुण क्रंदन कर रही थी ,चीख-चीखकर रो रही थी ।इस सब से बेखबर आकाश का 4 वर्षीय छोटा भाई खुशी में मगन था। उसे खुशी और गम में फर्क के बारे में पता जो नहीं है। उसकी खुशी उसका भोलापन देख मौजूद सभी लोगों का कलेजा फटा जा रहा था।

रिपोर्ट – संतोष कुमार शर्मा
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